
कांड्रा “राम मंदिर में मिलते हैं ना मस्जिदों में मिलते हैं, मां-बाप जन्नत हैं जो घर ही में मिलते हैं।” इन पंक्तियों को चरितार्थ करते हुए आज स्थानीय क्षेत्र में एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक संदेश सामने आया है। अपने माता-पिता की मधुर स्मृति और पुण्यतिथि के शुभ अवसर पर प्रख्यात समाजवादी डॉ. जोगेंद्र प्रसाद महतो ने समाज और युवा पीढ़ी को एक नई दिशा देने का आह्वान किया। इस दौरान माता-पिता के योगदान को याद करते हुए डॉ. महतो अत्यंत भावुक हो गए। उन्होंने भरे गले से कहा कि हमारे माता-पिता दिन-रात कड़ा परिश्रम करते हैं ताकि उनके बच्चों का भविष्य उज्जवल हो सके। माता-पिता वह महान हस्ती होते हैं जो अपनी संतान की खुशी के लिए हर दुख हंसते-हंसते सह जाते हैं। उनके दिल में बच्चों के प्रति कभी घृणा की भावना नहीं होती। मां जहां हमारा बेहतर मार्गदर्शन करती हैं, वहीं पिता हमारे जीवन के सबसे महान शिक्षक होते हैं। माता-पिता और दादा-दादी हमारे जीवन की वह आधारशिला हैं, जो हमें बिना किसी स्वार्थ के असीम प्यार और सही राह दिखाते हैं।
जीवित माता-पिता की सेवा ही सबसे बड़ा पुण्य
पुण्यतिथि के इस भावुक क्षण पर डॉ. जोगेंद्र प्रसाद महतो ने समाज और युवाओं से विशेष निवेदन किया कि वे अपने जीवित माता-पिता की पूरे मन से सेवा करें। उन्होंने कहा कि इस दुनिया में माता-पिता से बढ़कर कोई भगवान नहीं है और उनकी सेवा से बढ़कर कोई दूसरा पुण्य नहीं है। भौतिक वस्तुओं का मोह छोड़कर हमें कर्म की प्रधानता को समझना चाहिए, क्योंकि जीवन का अंतिम सत्य मृत्यु ही है और इंसान के साथ सिर्फ उसके कर्म जाते हैं।
संस्कार और आशीर्वाद ही सबसे बड़ी पूंजी
अपने स्वर्गीय माता-पिता को कोटि-कोटि नमन और सादर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा, “भले ही आज हमारे माता-पिता हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें, उनके दिए संस्कार और उनका आशीर्वाद हर पल हमारे साथ हैं। उनकी सीख ही हमारी जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी है।” इस अवसर पर भगवान गौतम बुद्ध से प्रार्थना की गई कि वे पुण्यात्माओं को अपने श्री चरणों में स्थान दें और परिजनों को उनके बताए सत्य, प्रेम और सेवा के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें।
