
संवाददाता, नोवामुंडी
नोवामुंडी प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) पप्पू रजक ने शुक्रवार को सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे के दौरान ऐसा उदाहरण पेश किया, जिसकी चर्चा पूरे प्रखंड में हो रही है। मनरेगा योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए वे जेटेया, बड़ापसिया, लतार, कुन्दीझोर, रायका और दुधविला जैसे दुर्गम गांवों तक पहुंचे। खराब और ऊबड़-खाबड़ रास्तों की परवाह किए बिना उन्होंने विभिन्न योजनाओं का स्थल निरीक्षण किया और कार्यों की गुणवत्ता की बारीकी से जांच की।
मनरेगा योजनाओं के निरीक्षण के बाद बीडीओ अचानक उत्क्रमित मध्य विद्यालय, बड़ा पसिया पहुंच गए। उनके औचक पहुंचने से विद्यालय में हलचल मच गई। उन्होंने कक्षाओं का निरीक्षण किया, शिक्षकों से पढ़ाई, बच्चों की उपस्थिति और विद्यालय संचालन से जुड़ी जानकारी ली तथा विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया।
निरीक्षण के दौरान सबसे खास और भावुक पल तब आया, जब बीडीओ पप्पू रजक ने अधिकारी वाली कुर्सी पर बैठने के बजाय बच्चों के बीच जमीन पर बैठना पसंद किया। उन्होंने बच्चों के साथ बैठकर वही मिड डे मील खाया, जो प्रतिदिन विद्यार्थियों को परोसा जाता है। भोजन की गुणवत्ता परखने के साथ उन्होंने बच्चों से पूछा कि खाना समय पर मिलता है या नहीं, पढ़ाई नियमित होती है या नहीं और विद्यालय में किसी प्रकार की परेशानी तो नहीं है।
बच्चों के लिए यादगार बना पल
बीडीओ को अपने बीच जमीन पर बैठकर भोजन करते देख बच्चे काफी उत्साहित हो गए। छोटे-छोटे बच्चों के चेहरे पर खुशी और आश्चर्य साफ दिखाई दे रहा था। कई बच्चों को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि प्रखंड का बड़ा अधिकारी उनके साथ बैठकर भोजन कर रहा है। बच्चों की मुस्कान, उत्साह और अपनापन देखते ही बन रहा था।
बीडीओ ने बच्चों से एक-एक कर परिचय लिया और उन्हें मन लगाकर पढ़ाई करने तथा जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बच्चों से विद्यालय की व्यवस्थाओं के बारे में भी जानकारी ली।
शिक्षकों को बेहतर व्यवस्था बनाए रखने का संदेश
बीडीओ ने विद्यालय के सभी शिक्षकों से बातचीत कर कहा कि शिक्षा व्यवस्था, मिड डे मील या विद्यालय से जुड़ी किसी भी समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जाए। किसी भी परेशानी की जानकारी तत्काल प्रखंड प्रशासन को दें, ताकि समय रहते उसका समाधान किया जा सके।
उन्होंने विद्यालय के खेल मैदान का भी निरीक्षण किया और कहा कि बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए खेल सुविधाओं को बेहतर बनाना जरूरी है। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन को मैदान को और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक प्रयास करने का निर्देश दिया।
दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचने का दिया संदेश
बीडीओ का यह दौरा केवल योजनाओं की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासन की संवेदनशीलता और जवाबदेही का संदेश भी दे गया। दुर्गम रास्तों से होकर सुदूर गांवों तक पहुंचना और फिर बच्चों के बीच जमीन पर बैठकर भोजन करना ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
इस औचक निरीक्षण ने यह संदेश भी दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालय और विकास योजनाएं प्रशासन की सीधी निगरानी में हैं। अधिकारी कभी भी पहुंचकर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति देख सकते हैं।
