
क्षेत्र के प्रतिष्ठित चिकित्सक डॉ. जोगेंद्र प्रसाद महतो के निवास स्थान पर आज शाम 4:00 बजे एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा। इस पावन अवसर पर डॉ. महतो ने समस्त ग्रामवासियों के नाम एक अत्यंत भावुक और प्रेरणादायक संदेश जारी किया है। उन्होंने अपने पूज्य पिता स्वर्गीय कैलाश प्रसाद और माता स्वर्गीय कुलजानी देवी को शत-शत नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर उन्होंने माता-पिता की महिमा को रेखांकित करते हुए प्रसिद्ध पंक्तियां साझा कीं कि न राम मंदिर में मिलते हैं, न मस्जिदों में मिलते हैं, मां-बाप तो वो जन्नत हैं, जो साक्षात घर में मिलते हैं।
इस अवसर पर डॉ. महतो ने जीवन के एक गहरे दर्द और अधूरेपन को साझा करते हुए बताया कि उनकी पूजनीय माता कुलजानी देवी जी एक समय अचानक लापता हो गई थीं। परिवार ने उन्हें हर संभावित स्थान पर ढूंढा और अथक प्रयास किए, परंतु उनका कोई सुराग नहीं मिल सका। अब भारी मन और गहरी कसक के साथ परिवार को यह स्वीकार करना पड़ रहा है कि उनकी ममतामयी माता इस नश्वर संसार को छोड़कर ईश्वर के चरणों में विलीन हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि मां की कमी जीवन में कभी पूरी नहीं हो सकती, पर उनका आशीर्वाद हमेशा परिवार के साथ रहेगा।
माता-पिता के संघर्षों को याद करते हुए डॉ. महतो ने कहा कि मां-बाप रात-दिन परिश्रम करते हैं ताकि बच्चों का भविष्य उज्ज्वल हो सके। वे संतान की खुशी के लिए हर दुख हंसते-हंसते सह जाते हैं, और उनके मन में कभी बच्चों के प्रति घृणा नहीं होती। जहां मां एक कुशल मार्गदर्शक है, वहीं पिता एक महान शिक्षक हैं। माता-पिता और दादा-दादी हमारे जीवन की वो आधारशिला हैं, जो हमें निस्वार्थ प्रेम और सही राह दिखाते हैं। इस दुनिया में माता-पिता से बड़ा कोई शुभचिंतक नहीं हो सकता। उन्होंने संकल्प लिया कि माता-पिता द्वारा सिखाए गए सेवा, संस्कार और ईमानदारी के पाठ को वे जीवनभर निभाएंगे। मां के दूध का कर्ज और पिता के पसीने की कीमत कभी चुकाई नहीं जा सकती, इसलिए उनके प्रति समर्पित रहना ही हर संतान का पहला कर्तव्य है।
पुण्यतिथि के इस मौके पर डॉ. महतो ने समस्त ग्रामवासियों से एक विनम्र अपील करते हुए कहा कि अपने जीवित माता-पिता की सेवा और सम्मान करें, क्योंकि यही इस संसार का सबसे बड़ा पुण्य और धर्म है। माता-पिता से बढ़कर इस जग में कोई भगवान नहीं है। उन्होंने जीवन के अंतिम सत्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मृत्यु अटल है और इस संसार से जाते समय भौतिक वस्तुएं यहीं रह जाती हैं। इसलिए हमें मोह का त्याग कर कर्म के मार्ग पर चलना चाहिए, क्योंकि कर्म का फल अवश्य मिलता है। जीवन की समस्याओं से भागने के बजाय उनका समाधान ढूंढना ही बुद्धिमानी है। अंत में उन्होंने भगवान गौतम बुद्ध से प्रार्थना की कि वे पूज्य माता-पिता की पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और परिवार को उनके दिखाए मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें।
