
इरादे अगर नेक और हौसले बुलंद हों, तो उम्र कभी बाधा नहीं बनती। इसे सच कर दिखाया है नोवामुंडी के लखन साई मस्जिद मोहल्ला निवासी महेरा युसुफ ने। मोबससिर युसुफ की 9 वर्षीय पुत्री महेरा ने पवित्र रमजान माह के दौरान पूरे 30 रोजे रखकर समाज के सामने एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है।
धैर्य और अनुशासन का परिचय
भीषण गर्मी और लंबे दिनों के बावजूद, महेरा ने सुबह सहरी से लेकर शाम इफ्तार तक पूरे धैर्य और निष्ठा के साथ अपने उपवास पूरे किए। परिजनों के अनुसार, महेरा ने न केवल रोजे रखे, बल्कि इस दौरान नियमित रूप से पांच वक्त की नमाज अदा की और कुरान व धार्मिक शिक्षाओं का भी पालन किया। इतनी कम उम्र में भूख-प्यास पर विजय पाकर भक्ति का ऐसा उदाहरण विरले ही देखने को मिलता है।
पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर
महेरा की इस उपलब्धि पर उनके परिवार के साथ-साथ पूरे मोहल्ले में हर्ष का माहौल है। इफ्तार के वक्त मोहल्ले के बुजुर्गों और प्रबुद्ध जनों ने मासूम महेरा के पास पहुंचकर उन्हें अपना आशीर्वाद दिया और उनके उज्जवल भविष्य की दुआएं मांगी।
“महेरा ने अपने मजबूत इरादे से यह साबित कर दिया कि खुदा की इबादत के लिए समर्पण जरूरी है। उसकी यह लगन अन्य बच्चों के लिए भी एक बड़ी सीख और प्रेरणा है।”
— मोहल्ला निवासी व स्थानीय समाज सेवी
बच्चों के लिए बनीं प्रेरणास्रोत
महेरा की इस सफलता की चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज के दौर में जहाँ बच्चे गैजेट्स और मनोरंजन में डूबे रहते हैं, वहीं महेरा जैसी बच्ची का अपनी संस्कृति और धर्म के प्रति इतना लगाव सराहनीय है। उनकी यह उपलब्धि अन्य बच्चों को भी अनुशासन और संयम की प्रेरणा दे रही है।
