
काण्ड्रा। काण्ड्रा एसकेजी कॉलोनी स्थित दे परिवार की ओर से आयोजित माँ विपत्तहारिणी पूजा का आज भक्तिमय माहौल में भव्य विसर्जन के साथ समापन हो गया। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के बीच विशाल खिचड़ी भोग का वितरण किया गया एवं दे परिवार ने माँ के चरणों में शीश नवाकर समस्त क्षेत्रवासियों की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। पूजा एवं विसर्जन के दौरान दे परिवार के सदस्य व प्रसिद्ध सोशल इन्फ्लुएंसर चंदन कुमार दे ने इस ऐतिहासिक परंपरा का जिक्र करते हुए कहा, “इस पूजा की शुरुआत मेरे पिताजी स्वर्गीय श्री अशोक कुमार दे ने की थी, जिसके बाद मेरे चाचा स्वर्गीय श्री अमर दे ने इसे आगे बढ़ाया। आज भले ही वे दोनों हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा शुरू की गई इस 40 वर्षों पुरानी पावन विरासत को हमारा पूरा दे परिवार आज भी पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रहा है। माँ विपत्तहारिणी का यह दरबार अटूट आस्था का केंद्र है और हम माँ से यही प्रार्थना करते हैं कि सभी के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहे।”
उल्लेखनीय है कि मंगलवार सुबह 10 बजे पंडित साधन मुखर्जी के आचार्यत्व में संपूर्ण विधि-विधान से माँ की पूजा-अर्चना कराई गई थी। , चंदन कुमार दे ने अपनी धर्मपत्नी राखी दे के साथ विशेष पूजा-अर्चना संपन्न की।

बुधवार दोपहर 1 बजे से श्रद्धालुओं के बीच विशाल खिचड़ी भोग का वितरण किया गया, जहाँ सैकड़ों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। तत्पश्चात शाम 4 बजे काण्ड्रा एसकेजी कॉलोनी से दे परिवार और स्थानीय ग्रामीणों ने जयकारों और गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा निकाली। इसके बाद माँ विपत्तहारिणी की प्रतिमा का विसर्जन काण्ड्रा क्षेत्र के रतनपुर गाँव स्थित तालाब में पूर्ण भक्तिभाव से किया गया

और श्रद्धालुओं ने माँ को भावभीनी विदाई दी।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में दे परिवार के उत्तम दे, गुरुपद दे, सुधांशु दे, अजय दे, चंडी दे, चंदन कुमार दे, संपद दे, दोलन दे, गौतम दे, दीपक दे, शुभम दे, पिंटू दे, पिंकी दे, पाखी दे सहित समस्त दे परिवार ने सक्रिय योगदान दिया।
