
म्यूनिसिपल सेस वापस लेने की मांग, सौरभ विष्णु ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
जमशेदपुर में जन विकास मंच के प्रमुख एवं पूर्व लोकसभा प्रत्याशी सौरभ विष्णु ने झारखंड सरकार द्वारा संपत्ति की खरीद-बिक्री (रजिस्ट्री) पर 7% स्टांप शुल्क के अतिरिक्त 10% म्यूनिसिपल सेस लगाने की प्रस्तावित योजना का तीखा विरोध करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले नगर निगमों का कामकाज सुधारने पर ध्यान दे, उसके बाद जनता पर नया आर्थिक बोझ डालने की बात करे।
सौरभ विष्णु ने बताया कि सरकार नगर निकायों की आय बढ़ाने के नाम पर म्यूनिसिपल सेस लगाने की तैयारी कर रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो जमीन, मकान और फ्लैट खरीदना आम लोगों के लिए और महंगा हो जाएगा। इसका सीधा असर मध्यम वर्ग और अपने जीवनभर की जमा-पूंजी से घर खरीदने वाले लोगों पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि मानगो नगर निगम का गठन हुए लगभग दो महीने हो चुके हैं, लेकिन आज तक जनता को कोई ठोस विकास कार्य देखने को नहीं मिला। सड़कें बदहाल हैं, नालियां जाम हैं, जगह-जगह गंदगी फैली हुई है, जलनिकासी की समस्या गंभीर बनी हुई है और नागरिक सुविधाओं में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। ऐसे में विकास के नाम पर जनता से अतिरिक्त सेस वसूलना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। “जनता ने नगर निगम इसलिए नहीं बनाया कि बिना काम किए नए-नए टैक्स लगाए जाएं। पहले विकास दिखाई दे, फिर किसी अतिरिक्त कर की बात हो। जनहित के खिलाफ लिए गए इस फैसले का जन विकास मंच सड़क से सदन तक लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगा।”
सौरभ विष्णु ने सवाल उठाया कि जब नगर निगम बनने के बाद भी जनता को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, तो आखिर सरकार किस आधार पर नया टैक्स लगाने की तैयारी कर रही है? जनता पहले से महंगाई की मार झेल रही है। ऐसे समय में नया म्यूनिसिपल सेस लोगों की कमर तोड़ने वाला कदम साबित होगा।
विष्णु ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग कि प्रस्तावित म्यूनिसिपल सेस को तत्काल वापस लिया जाए तथा नगर निगमों को मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार अपने बजट से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराए। सरकार पहले सड़क, नाली, सफाई, पेयजल और जलनिकासी अन्य मूलभूत सुविधाओं का विकास सुनिश्चित किया जाए।” विकास पहले, टैक्स बाद में सोचें” की नीति ही जनता के हित में होगी ।
