
प्रतिनिधि, नोवामुंडी कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों तो अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। इसे सच कर दिखाया है नोवामुंडी के पद्मावती जैन सरस्वती शिशु मंदिर की छात्रा अंजलि पोद्दार ने। एक साधारण सब्जी विक्रेता राकेश पोद्दार की बेटी अंजलि ने मैट्रिक की परीक्षा में 93.40% अंक हासिल कर न केवल अपने माता-पिता का नाम रोशन किया है, बल्कि स्कूल की सेकंड टॉपर बनकर सबको गौरवान्वित किया है।
बिना ट्यूशन, 13 घंटे की कड़ी मेहनत
अंजलि की यह सफलता इसलिए खास है क्योंकि इसके पीछे कोई महंगा कोचिंग संस्थान या सुख-सुविधाएं नहीं, बल्कि कड़ी तपस्या है। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अंजलि ने हिम्मत नहीं हारी और बिना किसी ट्यूशन के घर पर ही प्रतिदिन 12 से 13 घंटे पढ़ाई की। उन्होंने साबित कर दिया कि आत्मविश्वास और स्वाध्याय (Self-study) ही सफलता की असली कुंजी है।
गुरुजनों और परिवार को दिया श्रेय
अपनी इस उपलब्धि पर अंजलि ने खुशी जाहिर करते हुए इसका पूरा श्रेय अपनी गुरु मां सीमा पालीत, स्कूल के शिक्षकों, अपनी बड़ी बहन और माता-पिता को दिया। उन्होंने कहा, “मेरे परिवार ने सीमित संसाधनों के बाद भी मेरी पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने मुझे सही रास्ता दिखाया।”
भविष्य का लक्ष्य: समाज सेवा के लिए बनेंगी IAS
अंजलि की उड़ान यहीं रुकने वाली नहीं है। उन्होंने अपने भविष्य के संकल्प को साझा करते हुए बताया कि वह आगे चलकर IAS अधिकारी बनना चाहती हैं। प्रशासनिक सेवा में जाकर वह समाज की सेवा करना चाहती हैं और उन व्यवस्थाओं में सुधार लाना चाहती हैं जिनसे आम जनता का सीधा जुड़ाव है।
जूनियर्स को दिया सफलता का मंत्र
सफलता के शिखर पर पहुँचने के बाद अंजलि ने अपने जूनियर सहपाठियों को संदेश देते हुए कहा कि पढ़ाई को बोझ न समझें, बल्कि पूरे मन से शिक्षा ग्रहण करें। साथ ही उन्होंने अपने माता-पिता और गुरुजनों के प्रति सम्मान और उनके आदेशों के पालन को सफलता के लिए अनिवार्य बताया।
एक मिसाल: सब्जी के ठेले से लेकर स्कूल के टॉपर्स लिस्ट तक का अंजलि का यह सफर क्षेत्र के उन हजारों बच्चों के लिए मिसाल है जो संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी मानते हैं। अंजलि की इस कामयाबी पर पूरे नोवामुंडी क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।
