
जगन्नाथपुर (प्रतिनिधि): शिक्षा की लौ और कानून के ज्ञान के संगम से ही समाज सशक्त बनता है। इसी उद्देश्य के साथ, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष के मार्गदर्शन और सचिव (डालसा) के निर्देशन में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, जगन्नाथपुर में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के उपलक्ष्य में एक भव्य विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
संविधान निर्माता को नमन और अधिकारों का पाठ
कार्यक्रम की शुरुआत बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इस अवसर पर विद्यालय की शिक्षिकाओं ने छात्राओं को संविधान निर्माण में उनके अद्वितीय योगदान से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार बाबा साहेब का संघर्ष आज हर भारतीय को समानता, न्याय और गरिमा का अधिकार प्रदान करता है।

कानूनी अधिकारों से लैस हुईं छात्राएं
जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), चाईबासा के तत्वावधान में आयोजित इस सत्र में पारा लीगल वॉलंटियर उमर सादिक ने छात्राओं को व्यवहारिक कानूनी जानकारियां दीं। छात्राओं को विशेष रूप से गिरफ्तारी के समय मिलने वाले संवैधानिक अधिकारों के प्रति सचेत किया गया:
सूर्यास्त के बाद गिरफ्तारी पर रोक: छात्राओं को बताया गया कि कानूनन महिलाओं को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता।
जानने का अधिकार: गिरफ्तारी का ठोस कारण पूछने का अधिकार।

अपनों को सूचना: अपनी गिरफ्तारी की जानकारी परिवार या किसी परिचित तक पहुँचाने का अधिकार।
विधिक सहायता: वकील से संपर्क करने और डालसा के माध्यम से कानूनी मदद प्राप्त करने की प्रक्रिया।
सफलतापूर्वक संपन्न हुआ कार्यक्रम
कार्यक्रम में छात्राओं ने न केवल उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया, बल्कि अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी किया। मौके पर विद्यालय के शिक्षकगण और डालसा के प्रतिनिधि मौजूद रहे। यह जागरूकता कार्यक्रम न केवल सूचनात्मक रहा, बल्कि छात्राओं में आत्मविश्वास भरने वाला भी सिद्ध हुआ।
”संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का एक माध्यम है।”
