
सरायकेला-खरसावां जिला पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। एसपी मनोज कुमार स्वर्गीयर के नेतृत्व में जिला पुलिस ने दलमा सेंचुरी के तराई क्षेत्र, नीमडीह थाना क्षेत्र से एक हार्डकोर ईनामी नक्सली सहित 2 लोगों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार नक्सलियों में हार्डकोर ईनामी नक्सली सागर सिंह सरदार, उसकी पत्नी मीणा पहाड़िया और मदन महतो शामिल हैं। पुलिस ने इनके पास से एक राइफल, एक पिस्टल और एक बाइक भी बरामद की है।
विशेष सूत्रों के अनुसार, सागर सिंह सरदार वर्ष 2008 के आसपास करीब 12 वर्ष की उम्र में स्व. महावीर खड़िया एरिया कमांडर के संपर्क में आकर नक्सल संगठन से जुड़ा था। सागर सिंह टैंगाडीह पंचायत के टैंग़ाडीह गांव, टोला बेनाडीह निवासी राम सिंह का पुत्र है। 10 से 11 बर्ष की उम्र में ही वह संगठन का हार्डकोर सदस्य बन गया था।

जांच में पता चला है कि सागर सिंह ने पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के अयोध्या पहाड़ क्षेत्र की आदिम जनजाति समुदाय की युवती मीणा पहाड़िया से शादी कर ली थी और दोनों वहीं साथ रह रहे थे।
मंगलवार रात एसपी के नेतृत्व में चली छापेमारी में तीनों को गिरफ्तार कर चौका थाना में रखा गया है। पुलिस उनसे गहन पूछताछ कर रही है। सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में अन्य छिपे नक्सलियों और भारी मात्रा में हथियार बरामद होने की संभावना है। क्षेत्र में नक्सलियों के नेटवर्क को तोड़ने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा।
दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी की तराई में बेनाडीह गांव आज़ादीनस अबतक सड़क ओर मूलभूत सुविधाओं से वांक्षित रहे । नक्सली सागर सिंह के परिवार ने कहा – कम उम्र में घर से निकला था,पढ़ाई बीच में छोड़कर आखिर किया बात था जो नक्सली बनने की जानकारी नहीं । गिरफ्तार हार्डकोर नक्सली सागर सिंह सरदार के परिवार ने कहा है कि वह कम उम्र में ही घर छोड़कर चला गया था। सागर के पिता, चाचा उदय सिंह और भाई खीरौद सिंह ने बताया कि सागर गंहारिया के एक स्कूल में पढ़ता था। कुछ परेशानी के कारण वह किराए के कमरे में रहने लगा था। कुछ दिन बाद वह वापस गांव आया और उसे नीमडीह के रघुनाथपुर हाईस्कूल में दाखिला दिलाया गया।उसके बाद एक दिन चांडिल किताब खरीद करने के लिए गया ।ओर अबतक नहीं लौटे।परिवार ओर जिला प्रशासन का प्रयास किया गया वह मुख्यधारा में जुड़े ओर आत्म समर्पण कर दे, परन्तु आखिर कार आर्सेटिंग किया गया।

परिवार के अनुसार, इसके कुछ दिन बाद पता चला कि सागर दलमा जंगल चला गया है। काफी खोजबीन के बाद भी वह नहीं मिला। एक महीने बाद जानकारी मिली कि वह नक्सली संगठन से जुड़ गया है। उसके बाद से वह आज तक घर नहीं लौटा।जिला पुलिस प्रशासन की सहयोग से हम लोग दलमा पटमदा ,चाईबासा, खरसावां ,खूंटी आदि जगह पर खोजबीन किया था।नक्सल गतिविधि छोड़कर मुख्यधारा में जोड़े जाने का प्रयास किया गया था। सफल नहीं रहा ।परिवार के लोगों को पता नहीं चला कि उसके पुत्र आपने सहयोगी के पुलिस कस्टडी में, परिवारों का कहना जिला प्रशासन हम लोगों फोन संपर्क करते हे।परिवार को जब सागर की गिरफ्तार की सूचना मिला तो चेहरे में खुशी झलक दिखाई दी।
परिवार ने बताया कि वे टैंगाडीह पंचायत के जोनोडीह गांव के रहने वाले हैं। खेती और गाय-भैंस का दूध बेचकर जीवन यापन करते हैं। घर कच्चा है और गांव में आज भी कच्ची सड़क है। परिवार में कुल 6 लोग हैं और सभी कृषि पर निर्भर हैं।
परिजनों ने कहा कि सागर नक्सली क्यों बना इसकी कोई जानकारी नहीं है। इस बारे में सागर सिंह के बयान के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
समाचार लिखे जाने तक पुलिस अधिकारियों से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
