
प्रतिनिधि, नोवामुंडी संचार भारत न्यूज़विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर नोवामुंडी बाल विकास परियोजना कार्यालय परिसर में मंगलवार को जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में माताओं और आंगनबाड़ी सेविकाओं को स्तनपान के महत्व, शिशु के पोषण और कुपोषण से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।कार्यक्रम की अध्यक्षता बीडीओ सह प्रभारी सीडीपीओ पप्पू रजक ने की।

उन्होंने कहा कि मां का दूध नवजात शिशु के लिए प्रकृति का सबसे अनमोल उपहार है। जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और छह माह तक केवल मां का दूध देना बच्चे के बेहतर शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। इससे शिशु को बीमारियों से लड़ने की क्षमता मिलती है और कुपोषण का खतरा कम होता है।इस दौरान महिला पर्यवेक्षिका सीता कुमारी और पूजा कुमारी ने आंगनबाड़ी सेविकाओं को स्तनपान के वैज्ञानिक महत्व,

मां एवं बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव तथा पूरक आहार की शुरुआत से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने सेविकाओं से अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर माताओं को स्तनपान के प्रति जागरूक करने की अपील की।कार्यक्रम में मुंह जूठी संस्कार का भी आयोजन किया गया, जिसमें 13 बच्चों को पहला पूरक आहार ग्रहण कराया गया। माताओं को शिशुओं के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार की जानकारी देते हुए बेहतर पोषण सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया गया।कार्यक्रम के अंत में सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं ने संकल्प लिया कि वे गांव-गांव जाकर माताओं को स्तनपान के लाभों के प्रति जागरूक करेंगी और कुपोषण मुक्त समाज बनाने में अपनी भूमिका निभाएंगी।
