
कांड्रा:
कांड्रा बाना डूंगरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से शुक्रवार को पारंपरिक अनुष्ठान के साथ भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा की घुरती रथ यात्रा (बाहुड़ा यात्रा) अत्यंत श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ निकाली गई। इस पावन अवसर पर पूरा कांड्रा क्षेत्र ‘जय जगन्नाथ’ और ‘हरि बोल’ के जयकारों से गूंज उठा।

मौसीबाड़ी से मुख्य मंदिर वापसी की इस यात्रा के दौरान कांड्रा रेलवे फाटक से लेकर ग्राम प्रधान सुरेश महतो के आवास तक सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालु घंटों तक सड़कों पर डटे रहे और प्रभु के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया। पश्चिम बंगाल से आई विशेष कीर्तन मंडली ने ढोल-मंजीरों और गाजे-बाजे के साथ ऐसा हरि नाम संकीर्तन प्रस्तुत किया कि पूरा माहौल भक्ति रस में डूब गया।

रथ की रस्सी खींचने के लिए श्रद्धालुओं में मची होड़
विशेष रूप से सजाए गए प्रभु के भव्य रथ को खींचने के लिए भक्तों के बीच जबरदस्त होड़ देखने को मिली। ऐसी जनमान्यता है कि भगवान के रथ की रस्सी छूने और खींचने मात्र से मनुष्य को असीम पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के साथ पुरुष, महिलाएं और बच्चे सभी रथ की ओर खिंचे चले आ रहे थे।
1980 से चली आ रही है परंपरा: समाजसेवी विजय महतो
कांड्रा में रथ यात्रा का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है। वर्ष 1980 में समाजसेवी स्वर्गीय हमेंद्र महतो के प्रयास व सहयोग से इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत हुई थी, जो आज हजारों ग्रामीणों की अटूट आस्था का केंद्र बन चुकी है। स्वर्गीय महतो के आकस्मिक निधन के बाद इस गौरवशाली परंपरा को जीवित रखने की कमान अब उनके सुपुत्र व समाजसेवी विजय महतो ने स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से संभाली है।

श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण
रथ यात्रा के अवसर पर समस्त ग्रामीणों व कांड्रा पंचायत के पूर्व मुखिया के विशेष सहयोग से श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद के रूप में चने का वितरण किया गया। इस आयोजन को सफल बनाने और व्यवस्था संभालने में मुख्य रूप से समाजसेवी लाल बाबू महतो, समाजसेवी राम महतो, के0 दुर्गा राव,राहुल देव महतो, भोलू महतो, रंजीत मोदक, अशोक सिंह, सिमन्त घटवारी, दिलीप दे,विश्वनाथ रजक, समेत समस्त कांड्रा वासियों का सराहनीय योगदान रहा।
