
जमशेदपुर: बरसात का मौसम शुरू होते ही पूर्वी सिंहभूम सहित झारखंड के कई क्षेत्रों में मलेरिया का खतरा बढ़ जाता है। विशेषकर ग्रामीण और वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन जाता है। ऐसे समय में केवल स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की भी जिम्मेदारी है कि मलेरिया की रोकथाम और बचाव के लिए सक्रिय भूमिका निभाए।
भाजपा (अनुसूचित जनजाति मोर्चा) के प्रदेश मीडिया प्रभारी विजय गोंड ने कहा कि पूर्वी सिंहभूम के कई गांवों से मलेरिया के मामले सामने आने की जानकारी मिल रही है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समय पर जांच, दवा, फॉगिंग और जनजागरूकता अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में विशेष टीम भेजकर नियमित जांच शिविर आयोजित करने, पर्याप्त दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने, मच्छरनाशक दवाओं का छिड़काव कराने तथा घर-घर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि मलेरिया जैसी बीमारी से बचाव पूरी तरह संभव है, यदि समय रहते सावधानी बरती जाए। घर और आसपास पानी जमा न होने दें, साफ-सफाई बनाए रखें, रात में मच्छरदानी का नियमित उपयोग करें, पूरी बांह के कपड़े पहनें तथा तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द या शरीर में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
विजय गोंड ने कहा कि सरकार, स्वास्थ्य विभाग, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से ही मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि पूर्वी सिंहभूम सहित मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाया जाए, नियमित फॉगिंग कराई जाए, प्रत्येक पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाया जाए तथा आवश्यक दवाओं और जांच सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
अंत में उन्होंने सभी नागरिकों से अपील करते हुए कहा, “मलेरिया से डरने की नहीं, बल्कि जागरूक होकर उससे लड़ने की आवश्यकता है। आइए, हम सभी मिलकर पूर्वी सिंहभूम और पूरे झारखंड को मलेरिया मुक्त बनाने का संकल्प लें।”
