
भव्य आयोजन: लिपुंगा के देयूरी ने की पूजा-अर्चना, एसडीओ ने समाज से नशाखोरी और अंधविश्वास त्यागने की अपील की
नोवामुंडी | प्रतिनिधि

आदिवासी एसोसिएशन नोवामुंडी के तत्वावधान में आयोजित ‘बाहा मिलन समारोह’ शनिवार को हर्षोल्लास और पारंपरिक गरिमा के साथ संपन्न हुआ। इस समारोह में सांस्कृतिक संगम का ऐसा अद्भुत नजारा दिखा कि पूरा नोवामुंडी क्षेत्र मांदर की थाप और पारंपरिक गीतों से गुंजायमान हो उठा। कार्यक्रम में उमड़े जनसैलाब ने यह साबित कर दिया कि आधुनिकता के दौर में भी अपनी जड़ों के प्रति प्रेम अटूट है।
धार्मिक विधि-विधान से शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ लिपुंगा गांव से आए देयूरी (पुजारी) द्वारा पूरी पवित्रता के साथ किया गया। उन्होंने आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार प्रकृति की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। इसके पश्चात मुख्य अतिथियों ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन
समारोह में पहुंचे मुख्य अतिथि जगन्नाथपुर के एसडीओ महेंद्र छोटन उरांव का स्वागत बेहद खास तरीके से किया गया। उन्हें आदिवासी संस्कृति के प्रतीक स्वरूप ‘साल पत्तों’ से बनी टोपी पहनाई गई। इसके बाद विभिन्न सांस्कृतिक दलों ने एक से बढ़कर एक पारंपरिक नृत्य और गीत पेश किए, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

समाज सुधार पर जोर
मुख्य अतिथि महेंद्र छोटन उरांव ने अपने संबोधन में पर्व की बधाई देते हुए सामाजिक बुराइयों पर प्रहार किया। उन्होंने कहा:
”बाहा पर्व हमें प्रकृति से जोड़ता है, लेकिन समाज की वास्तविक उन्नति तभी होगी जब हम शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान देंगे। हमें अंधविश्वास और नशाखोरी जैसी कुरीतियों को जड़ से उखाड़ फेंकना होगा।”
पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा ने भी संबोधित करते हुए कहा कि नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और उसे आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
प्रमुख रूप से रहे उपस्थित
कार्यक्रम को सफल बनाने में आदिवासी संगठन के अध्यक्ष घनश्याम हेंब्रम, मिथुन चंपिया, मुंडा घसूवा बारजो, अल्बर्ट मुंडा, सुबोध सिनकु, पानी लागूरी, मालती लागूरी, शुभनी अल्बर्ट मुंडा और फिरोज अहमद की अहम भूमिका रही।
समापन: कार्यक्रम के अंत में पूर्व मुखिया मतीयस सुरेन ने सभी अतिथियों और ग्रामीणों के प्रति धन्यवाद ज्ञापन किया। समारोह के समापन तक सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण उत्साह के साथ डटे रहे।
