
कांड्रा के पिंड्राबेड़ा गांव में सरहुल महोत्सव बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया। नायके बाबा सुनील मार्डी, नायके आयो कंचन मार्डी, मांझी बाबा सोमाय मार्डी, और माझी आयो संजोती मार्डी की अगुवाई में समस्त पिन्ड्रा बेड़ा मांझी होपन की देख रेख में यह पर्व सपन्न हुआ। इस अवसर पर आदिम सरना धरम जाहेर गाढ़ में आयोजित कार्यक्रम में संग्राम मार्डी ने कहा, “सरहुल पर्व हमारे आदिवासी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो हमें जीवन के महत्व को समझने और प्रकृति के साथ जुड़ने की प्रेरणा देता है। यह पर्व हमें अपने पूर्वजों की याद दिलाता है और हमें उनकी परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश देता है।”

सरहुल पर्व के बारे में बताते हुए संग्राम मार्डी ने कहा, “सरहुल पर्व प्रकृति और जीवन के चक्र का प्रतीक है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि जीवन में प्रकृति का कितना महत्व है और हमें इसका सम्मान करना चाहिए। इस पर्व के माध्यम से हम अपने समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी देते हैं।”

इस अवसर पर ग्रामीणों ने पारंपरिक नृत्य और गीतों के साथ सरहुल महोत्सव मनाया। मौके पर उपस्थित लोगों ने एक दूसरे को बधाई दी और पर्व की शुभकामनाएं दी। इस पर्व में शामिल होने के लिए आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचे थे। संग्राम आर्डी ने कहा कि सरहुल पर्व में आदिवासी लोग मारंग बुरु (महादेव), जाहेर आयो (ग्राम देवी), लिटे गुसाई (लिटे का देव), मोरे को तुरीको (मोरे को तुरीको देव), और वर्ष के सरपंर्थप (वर्षा देव) को फूल, फल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित की जाती है। आम जन नया फूल और फल ग्रहण करते हैं और पर्व की शुभकामनाएं देते हैं।

यह पर्व अच्छी वर्षा, पर्यावरण का अच्छा सभ्य समाज निर्माण और गंभीर से गंभीर बीमारियों का नहीं होना दर्शाता है। इस पर्व के माध्यम से आदिवासी समाज अपनी संस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने का प्रयास करता है।

वही मौके पर मुख्य रूप से संग्राम माडी,नायके बाबा सुनील मार्डी, नायके आयो कंचन मार्डी, मांझी बाबा सोमाय मार्डी, और माझी आयो संजोती मार्डी,सुरेश टुडू, कालीचरण हांसदा, नारसिंह माडी, लुसको टुडू, मार्शल मार्डी, कुशल मार्डी, अविनाश टुडू, बेजनती टुडू, सुमन, मार्डी, के साथ सैकड़ो की संख्या में ग्रामीण मौजूद थे
