आनन्द मार्ग प्रचारक संघ सरायकेला खरसावां द्वारा कांड्रा के आनंद मार्ग में एक दिवसीय प्रथम डिट स्तरीय सेमिनार आनन्द मार्ग जागृति का आयोजन किया गया जिसमें . राजेन्द्र प्रसाद बताया कि श्री श्री आनन्दमूर्ति ने शिव शिक्षा के 12 सूत्रों की व्याख्या की है जिनमें शिव पुराण, शिव संहिता और आगम निगम शास्त्र को समाहित कर दिया है।

उन्होंने न केवल मनुष्य वरन् समस्त जीव जगत के कल्याण के लिए अपना सर्वस्व लुटा दिया और अपने अपने आगमन को सार्थक कर के इस धरती के कण कण को पवित्र कर गए। प्राचीन काल के शोषित, पीड़ित और अवहेलित जन समुदाय ने भगवान शिव को अपने परम् आश्रय के रूप में पाया था।भगवान शिव ने कहा था “वर्तमानेषु वर्तेत” अर्थात धर्म के पथ पर चलने वाले को वर्तमान में जीना होगा। अतीत का गुणगान करने और भविष्य की काल्पनिक रूपरेखा में जीना निरर्थक है।

शिव के अनुसार, मानव जीवन का उद्देश्य है,” आत्म मोक्षार्थम् जगत् हिताय च” अर्थात धर्म के पथ पर चलने वालों को जगत् के हित के लिए भी काम करना होगा। जो व्यवस्था जन साधारण को सम्मानजनक जीने के अधिकार से वंचित करती है, वहीं इस कार्यक्रम को सफल बनाने में भुक्ति प्रधान गोपाल बर्मन, सूर्य प्रकाश, सुदर्शन, बसन्त राम देव , भर्त हरि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
