
प्रतिनिधि, नोवामुंडी मेहनत, लगन, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के दम पर नोवामुंडी की बेटी कोयल पॉल ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर अपने परिवार, विद्यालय और पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है.सेंट मैरी स्कूल, नोवामुंडी की पूर्व छात्रा कोयल पॉल ने देश के प्रतिष्ठित मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली से फॉरेंसिक मेडिसिन में एमडी की उपाधि प्राप्त की है.कोयल पॉल के पिता कनाई पॉल नोवामुंडी के बाजार चौक में किताब-कॉपी की दुकान चलाते हैं और दैनिक अखबारों की बिक्री भी करते हैं.साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि से निकलकर देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान तक पहुँचना कोयल की कठिन मेहनत, निरंतर प्रयास और परिवार के सहयोग की कहानी है.सेंट मैरी स्कूल से शुरू हुआ सफर, दिल्ली तक पहुँचाकोयल की शैक्षणिक यात्रा सेंट मैरी स्कूल, नोवामुंडी से शुरू हुई, जहाँ उन्होंने कक्षा 10वीं तक शिक्षा प्राप्त की.इसके बाद उन्होंने श्री चैतन्य, विशाखापत्तनम से कक्षा 12वीं की पढ़ाई पूरी की.चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए उन्होंने कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, मंगलुरु से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की.इसके बाद मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली से फॉरेंसिक मेडिसिन में एमडी पूरा कर अपनी शैक्षणिक यात्रा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की.माता-पिता और शिक्षकों के सहयोग को दिया श्रेयकोयल ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता के निरंतर सहयोग, त्याग और विश्वास के साथ-साथ अपने स्कूल के शिक्षकों एवं मार्गदर्शकों के मार्गदर्शन को दिया.उनका कहना है कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए परिश्रम, अनुशासन और निरंतरता बेहद जरूरी है.उन्होंने सेंट मैरी स्कूल के योगदान को भी विशेष रूप से याद किया.विद्यालय में अंग्रेज़ी बोलने और लिखने पर दिए गए अनुशासन ने उनकी अभिव्यक्ति को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.वहीं, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों ने उन्हें पढ़ाई के साथ मानसिक संतुलन और रचनात्मकता का महत्व समझाया.‘रटने के बजाय अवधारणाओं को समझना जरूरी’कोयल की सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक सीख है कि किसी विषय को केवल परीक्षा के लिए रटने के बजाय उसकी मूल अवधारणाओं को समझना चाहिए.नियमित अध्ययन, समय-समय पर पुनरावृत्ति और निरंतरता अंतिम समय की तैयारी की तुलना में अधिक प्रभावी होती है.उनके अनुसार, “परिश्रम, अनुशासन, निरंतरता, सही मार्गदर्शन और परिवार का सहयोग ही सफलता की मजबूत नींव है।”कोयल पॉल की यह उपलब्धि उनके परिवार के साथ-साथ सेंट मैरी स्कूल और पूरे नोवामुंडी क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है.बाजार चौक की किताब-कॉपी की दुकान और अखबार बिक्री से जुड़े परिवार से निकलकर देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज से फॉरेंसिक मेडिसिन में एमडी की उपाधि हासिल करने वाली कोयल की सफलता क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए मेहनत, धैर्य और लक्ष्य के प्रति समर्पण की प्रेरणादायक मिसाल बन गई
