
जमशेदपुर। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के तत्वावधान में ‘नमामि भारतम्’ अभियान के अंतर्गत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन का आयोजन शुक्रवार को बागबेड़ा संकुल के अंतर्गत बिरसानगर स्थित प्रगति सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, विद्यालय में उत्साह एवं देशभक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता की आरती के साथ हुआ। तत्पश्चात विद्यालय के उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, प्रधानाचार्य अभिलाष गिरि एवं अभिभावकों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन किया गया। उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने कार्यक्रम की प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए ‘नमामि भारतम्’ अभियान के उद्देश्य एवं महत्ता पर प्रकाश डाला।इस अवसर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती भी श्रद्धापूर्वक मनाई गई। उनके चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की गई।

हिंदी की वरिष्ठ आचार्या निभा दीदी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के जीवन, एकात्म मानववाद के विचार तथा राष्ट्र एवं समाज के प्रति उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका जीवन सादगी, सेवा, राष्ट्रनिष्ठा और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का संदेश देता है।प्रातः 11 बजे निर्धारित समय पर विद्यालय परिसर में भैया-बहनों, आचार्य-आचार्याओं, अभिभावकों एवं समाज के लोगों ने एक साथ ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन किया। देशभर में निर्धारित समय पर आयोजित इस सामूहिक गायन अभियान में बड़ी संख्या में भारतीयों के सहभागी बनने का लक्ष्य रखा गया। इस व्यापक आयोजन के माध्यम से सामूहिक सहभागिता का रिकॉर्ड गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने का प्रयास भी किया जाएगा।‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन से पूरा विद्यालय परिसर राष्ट्रभक्ति के भाव से गूंज उठा। उपस्थित सभी लोगों ने एक स्वर में राष्ट्रगीत का गायन कर राष्ट्रीय एकता, अखंडता एवं देशप्रेम का संदेश दिया।कार्यक्रम का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय विरासत से जोड़ना, राष्ट्र के प्रति सम्मान एवं समर्पण की भावना जागृत करना तथा ‘वंदे मातरम्’ के माध्यम से राष्ट्रीय एकता और सामूहिक चेतना को मजबूत करना रहा।कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के प्रधानाचार्य अभिलाष गिरि, सभी आचार्य-आचार्याओं, भैया-बहनों, अभिभावकों एवं समाज के लोगों की सक्रिय सहभागिता रही। अंत में आचार्या बबिता दीदी ने उपस्थित सभी अतिथियों, अभिभावकों, भैया-बहनों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम का समापन किया।
