
सरायकेला। मानवाधिकार सहायता संघ महिला प्रकोष्ठ, सरायकेला-खरसावां की जिला अध्यक्ष श्रीमती सुमन कारूवा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर देशभर के सफाई, आउटसोर्स एवं संविदा कर्मचारियों द्वारा नियमितीकरण की मांग को जायज बताया है। उन्होंने कहा कि वर्षों से एक ही कार्य करने के बावजूद इन कर्मचारियों को स्थायी दर्जा नहीं मिल रहा है, जबकि उनसे नियमित कर्मचारियों की तरह ही काम लिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और झारखंड सहित कई राज्यों में आउटसोर्स एवं संविदा कर्मचारी नियमितीकरण, नौकरी की सुरक्षा, समान कार्य के लिए समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं।
पंजाब में 65,048 आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण की दिशा में सरकार द्वारा निर्णय लिए जाने तथा अगस्त 2026 में विधानसभा से संबंधित विधेयक पारित होने का भी उन्होंने उल्लेख किया। इसके तहत पीएफ, ग्रेच्युटी और मातृत्व अवकाश जैसे लाभ मिलने का रास्ता खुलने की बात कही गई है।
वहीं मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी आउटसोर्स एवं संविदा कर्मचारियों ने नियमितीकरण, उचित वेतन, सेवा सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा सहित विभिन्न मांगें सरकार के समक्ष रखी हैं। झारखंड के रांची, जमशेदपुर, सरायकेला और धनबाद में भी सफाई, आउटसोर्स एवं संविदा कर्मचारियों द्वारा नियमितीकरण, समान वेतन और लंबित वेतन के भुगतान की मांग उठाई जा रही है।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
- आउटसोर्स एवं संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण कर स्थायी नियुक्ति दी जाए।
- समान कार्य के लिए समान वेतन लागू किया जाए।
- नौकरी और सेवा की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
- पीएफ, पेंशन, ग्रेच्युटी और मातृत्व अवकाश जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं मिलें।
- सभी राज्यों में कर्मचारियों के लिए एक समान नीति लागू की जाए।
- लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान किया जाए।
सुमन कारूवा ने कहा कि कर्मचारी अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी और ठोस समाधान चाहते हैं। अब कर्मचारियों की नजर सरकारों के आगामी फैसलों पर टिकी है।
