
आज आनन्द मार्ग स्कूल कांड्रा में बाबा नाम केवलम कीर्तन सत्संग का आयोजन किया गया .जिसमें बसन्त रामदेव ने कहा कोई कोई मनुष्य अपनी शिक्षा- दीक्षा, विद्या- बुद्धि, सौभाग्य को लेकर खूब प्रशंसा करते हैं, किन्तु इस पृथ्वी की कोई चीज तो चिरन्तन नहीं है | इसलिये जो मनुष्य किसी पार्थिव चीज को लेकर प्रशंसा करता है, वह तो मूर्ख है |.

सब से खराब मानसिक बन्धन है मिथ्या अहंकार ; क्योंकि इस विश्व का सब कुछ परमपुरुष का है, मेरा कहकर कुछ नहीं है | इसलिये परमपुरुष के पास मनुष्य को सोलह आना आत्मसमर्पण करना उचित है | मानसिक अग्रगति के लिये यह है एक अपरिहार्य शर्त | यदि सही रुप में जगत की सेवा करना चाहते हो, तब परमपुरुष के पादमूल में समर्पण करना ही होगा | अर्थात् वही शाश्वत सत्ता परमपुरुष के पास नम्रता से न्योछावर को स्वीकार करना ही है प्रणिपात | इस सृष्ट जगत् के वास्तविक मालिक हैं,

परमपुरुष | यहाँ जो भी कर्मधारा है | वह सब उनकी है | हमलोग सब जन परमपुरुष के माध्यम मात्र है | मुझे जिस कार्य का दायित्व दिया गया है वह कार्य न करें, वे इस कार्य को दूसरे को देकर करा लेंगे | इसलिये किसी कार्य को करने के पहले अवश्य ही यह भावना लेनी होगी कि परमपुरुष कृपा कर मेरे माध्यम से वह कार्य करा लेते हैं | इस कार्यक्रम में भुक्ति प्रधान गोपाल बर्मन ,सूर्य प्रकाश ,सुदर्शन इत्यादि मौजूद थे ।
