
नोवामुंडी: पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी प्रखंड में जंगली हाथियों का झुंड लगातार आबादी वाले इलाकों में घुसकर तबाही मचा रहा है। गीति केन्दु, सेल दौरि समेत आसपास के कई गांवों में हाथियों की आवाजाही से ग्रामीणों का जनजीवन प्रभावित हो गया है। खेतों में खड़ी फसलें रौंदी जा रही हैं, जबकि आम और कटहल के बगीचों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

गुरुवार देर रात हाथियों का झुंड गीति केन्दु गांव पहुंच गया, जहां सुरेश हेंब्रम, ओबिन हेंब्रम, दिनेश लागूरी और बिपिन लागूरी के कच्चे मकानों को आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया। हालांकि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन पूरे गांव में दहशत का माहौल बना रहा। ग्रामीण पूरी रात जागकर अपने परिवारों और घरों की सुरक्षा करते रहे।हाथियों के लगातार स्थान बदलने से वन विभाग की परेशानी भी बढ़ गई है। स्थिति को देखते हुए चाईबासा, हाटगम्हरिया और नोवामुंडी से वन विभाग की क्विक रिस्पांस टीम (QRT) प्रभावित क्षेत्रों में भेजी गई है।

टीम मशाल और पटाखों की मदद से हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास कर रही है।लगातार हो रही बारिश के कारण राहत एवं बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण हो गया है, फिर भी वनकर्मी हाथियों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं।वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी हालत में हाथियों के करीब न जाएं और न ही उन्हें खुद भगाने की कोशिश करें। किसी भी आपात स्थिति की जानकारी तत्काल विभाग को दें। विभाग ने फसल, बागवानी और मकानों को हुए नुकसान का नियमानुसार मुआवजा देने का आश्वासन भी दिया है। इसके लिए प्रभावित परिवारों को आवेदन जमा करने को कहा गया है।हाथियों के लगातार गांवों के आसपास मंडराने से ग्रामीणों में भय का माहौल है। कई परिवार रातभर जागकर पहरा देने को मजबूर हैं, जबकि बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक सहमे हुए हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि हाथियों के झुंड को जल्द आबादी से दूर किया जाए और इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं।
