
प्रतिनिधि, नोवामुंडीनोवामुंडी से मानवता को झकझोर देने वाली तस्वीरनोवामुंडी रेलवे फाटक ओवरब्रिज के पिलर नंबर 11 के पास इस भीषण गर्मी में एक वृद्ध महिला कई दिनों से भूख, प्यास और बीमारी की हालत में जिंदगी और मौत से अकेले संघर्ष कर रही है। हालत इतनी गंभीर है कि वह न ठीक से उठ पा रही है और न चल पा रही है। आँखों में आँसू और चेहरे पर दर्द लिए वह राहगीरों से मदद की गुहार लगा रही है, लेकिन इंसानियत मानो इस रास्ते से गुजरते लोगों के साथ कहीं खो गई है।सबसे शर्मनाक बात यह है कि अब तक न स्थानीय प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर पहुँचा, न डालसा का कोई प्रतिनिधि, न जनप्रतिनिधि और न ही समाज सेवा का दावा करने वाली संस्थाएँ। जबकि नोवामुंडी में महिला समितियाँ, जेएसएलपीएस के स्वयं सहायता समूह और कई सामाजिक संगठन सक्रिय होने का दावा करते हैं, लेकिन इस बेसहारा वृद्धा की सुध लेने वाला कोई नजर नहीं आया।क्या किसी की मौत का इंतजार कर रहा है प्रशासन?स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी ओवरब्रिज के नीचे पहले भी दो लोगों की मौत हो चुकी है, फिर भी प्रशासन ने कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की। अब एक और जिंदगी धीरे-धीरे मौत के करीब पहुँच रही है और जिम्मेदार लोग चुप्पी साधे बैठे हैं।सरकार और जनप्रतिनिधियों से सवालक्या गरीब और बेसहारा लोगों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं?क्या प्रशासन किसी बड़ी घटना के बाद ही जागेगा?क्या मानवता अब केवल भाषणों और पोस्टरों तक सीमित रह गई है?महिला सुरक्षा और सामाजिक सेवा के दावे आखिर जमीन पर क्यों नहीं दिखते?तत्काल मांगवृद्ध महिला को तुरंत अस्पताल पहुँचाया जाएभोजन, पानी और इलाज की व्यवस्था होक्षेत्र में बेसहारा लोगों के लिए राहत और निगरानी व्यवस्था बनेजिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनोवामुंडी आज सिर्फ एक वृद्ध महिला की पीड़ा नहीं देख रहा, बल्कि मरती हुई मानवता का चेहरा देख रहा है।
