
जमशेदपुर में रही पारिवारिक हिंसा और हत्या की घटनाओं का कारण बताते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सौरभ विष्णु ने शहर में मानसिक स्वास्थ्य एवं तनाव प्रबंधन केंद्र स्थापित करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ता मानसिक तनाव, अवसाद और सामाजिक दबाव अब केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं बल्कि यह समाज और कानून व्यवस्था के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है।
सौरभ विष्णु ने कहा कि हाल ही में एग्रिको में टाटा स्टील कर्मचारी द्वारा अपनी पत्नी, बेटे और बेटी की हत्या की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया। इससे पहले कदमा क्षेत्र में भी इसी तरह की दर्दनाक घटना सामने आ चुकी है। दोनो ही टाटा स्टील के कर्मचारी थे | उन्होंने कहा कि दोनों घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि लोगों के भीतर मानसिक दबाव और तनाव लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, आर्थिक दबाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति और सोशल मीडिया का असर युवाओं और कर्मचारियों को मानसिक रूप से कमजोर बना रहा है। लेकिन शहर में मानसिक तनाव प्रबंधन संस्थान, काउंसलिंग सेंटर और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं।
सौरभ विष्णु ने कहा कि विदेशों में हर क्षेत्र में मानसिक तनाव प्रबंधन संस्थान और काउंसलिंग सेंटर उपलब्ध रहते हैं, जहां लोग समय रहते विशेषज्ञों से सलाह लेकर तनाव कम कर पाते हैं। लेकिन जमशेदपुर जैसे बड़े औद्योगिक शहर में ऐसी सुविधाओं का अभाव बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर हिंसा, घरेलू विवाद, सड़क झगड़े, आत्महत्या और युवाओं में बढ़ती आपराधिक प्रवृत्ति यह दर्शाती है कि समाज को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति गंभीर होने की जरूरत है। यदि समय पर काउंसलिंग और मानसिक सहयोग मिले, तो कई घटनाओं को रोका जा सकता है।
सौरभ विष्णु ने प्रशासन, कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों से मांग की कि शहर में आधुनिक मानसिक स्वास्थ्य केंद्र, हेल्पलाइन और नियमित काउंसलिंग व्यवस्था शुरू की जाए। साथ ही स्कूलों, कॉलेजों और औद्योगिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाए जाएं, ताकि लोग बिना झिझक अपनी समस्याएं साझा कर सकें।
उन्होंने कहा कि जिस तरह शारीरिक स्वास्थ्य के लिए अस्पताल जरूरी हैं, उसी तरह मानसिक स्वास्थ्य के लिए विशेष संस्थानों की भी आवश्यकता है। समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में सामाजिक असंतुलन और अपराध की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
