
जमशेदपुर: लौहनगरी के बागबेड़ा में साहित्य और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला, जहाँ शब्दों की मर्यादा और सुरों के ताल ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। शकुंतला हिंदी साहित्य एवं सांस्कृतिक दर्पण मंच के बैनर तले बागबेड़ा कॉलोनी स्थित शांति निकेतन स्कूल परिसर में आयोजित इस भव्य कवयित्री सम्मेलन ने न केवल बौद्धिक चेतना को जगाया, बल्कि कला और साहित्य के प्रति समाज के अटूट प्रेम को भी प्रदर्शित किया। पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता के कुशल नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम ने रांची और जमशेदपुर की प्रख्यात कवयित्रियों को एक मंच पर लाकर क्षेत्र के सांस्कृतिक परिदृश्य में एक नया अध्याय जोड़ दिया।

कार्यक्रम का आगाज मां सरस्वती की वंदना से हुआ, जिसके बाद मंच की संस्थापक अंकिता सिन्हा के सधे हुए संचालन ने कार्यक्रम में प्राण फूंक दिए। उपासना सिन्हा, माधवी उपाध्याय और वीणा पाण्डेय भारती जैसी प्रखर रचनाकारों ने जब अपनी कविताओं के पिटारे खोले, तो नारी सशक्तिकरण, राष्ट्रीय चेतना और प्रकृति के विविध रंग जीवंत हो उठे। इस अवसर पर शिक्षाविद पारस नाथ मिश्रा और सेलिब्रिटी मेकअप आर्टिस्ट पूजा दत्ता जैसी विभूतियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

आयोजन का एक मुख्य आकर्षण सम्मान समारोह रहा, जहाँ मुखिया मायावती टुडू, नीनू कूदादा और सुनील गुप्ता समेत अन्य अतिथियों ने कवयित्रियों को शॉल और मोमेंटो भेंट कर उनकी लेखनी का सम्मान किया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवी संस्थाओं के इस साझा प्रयास ने यह संदेश दिया कि आधुनिकता के दौर में भी साहित्य की जड़ें हमारे समाज में गहरी जमी हुई हैं। भारी संख्या में उमड़े साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि बागबेड़ा की धरती केवल औद्योगिक विकास ही नहीं, बल्कि बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास के लिए भी उतनी ही उर्वर है। सुनील गुप्ता ने कार्यक्रम के अंत में विश्वास जताया कि ऐसे मंचों से न केवल नई प्रतिभाओं को पहचान मिलेगी, बल्कि समाज में सकारात्मक विचारों का संचार भी होगा।
