
कोटगढ़ पूर्वी पीढ़ के मानकी निरंजन बोबोंगा की अध्यक्षता में सोमवार को मानकी, मुण्डा, डाकुवा एवं रैयत बुद्धिजीवियों की एक महत्वपूर्ण बैठक नोवामुंडी प्रखण्ड परिसर मे आयोजित की गई। बैठक में पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने, मानकी-मुण्डा बहाली प्रक्रिया, सम्मान राशि तथा विलकिंशन रूल से जुड़े विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
बैठक में केंद्रीय अध्यक्ष गणेश पाठ पिंगुवा एवं संगठन के सलाहकार रामेश्वर सिंह कुंटिया ने उपस्थित मानकी, मुण्डा, डाकुवा एवं रैयतों को पारंपरिक प्रशासनिक व्यवस्था, अधिकार एवं कर्तव्यों की जानकारी देते हुए प्रशिक्षण प्रदान किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था सदियों से सामाजिक एकता और ग्राम प्रशासन की मजबूत आधारशिला रही है, जिसे संरक्षित और सशक्त करने की आवश्यकता है।
प्रशिक्षण के दौरान वक्ताओं ने मानकी-मुण्डा व्यवस्था से संबंधित विलकिंशन रूल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, बहाली प्रक्रिया एवं वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डाला। साथ ही सरकार से मानकी, मुण्डा एवं डाकुवा को मिलने वाली सम्मान राशि में वृद्धि तथा लंबित मांगों के शीघ्र समाधान की मांग भी उठाई गई।
बैठक में प्रखंड क्षेत्र के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी पर चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षकों के अभाव में ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। इस संबंध में सरकार से शीघ्र रिक्त पदों पर नियुक्ति करने की मांग की गई।
इसके अलावा ग्राम स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने, ग्रामीण विकास योजनाओं में पारंपरिक ग्राम प्रधानों की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा सामाजिक अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने पर भी जोर दिया
अध्यक्षीय संबोधन में निरंजन बोबोंगा ने कहा कि समाज की एकता एवं पारंपरिक व्यवस्था की मजबूती के लिए नियमित रूप से इस प्रकार की बैठक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने सभी मानकी, मुण्डा, डाकुवा एवं रैयतों से सामाजिक हित के मुद्दों पर एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।
बैठक में क्षेत्र के कई मानकी, मुण्डा, डाकुवा, बुद्धिजीवी एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।
