
कांड्रा : भारत रत्न और भारतीय संविधान के जनक डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर समाजसेवी डॉ. जोगेंद्र प्रसाद महतो ने उन्हें कोटि-कोटि नमन करते हुए उनके सिद्धांतों को जीवन में उतारने का संकल्प लिया। इस दौरान उन्होंने बाबा साहेब के संघर्षमय जीवन और उनके द्वारा समाज को दिए गए महान संदेशों पर प्रकाश डाला।
शिक्षा और संघर्ष ही सफलता की कुंजी
डॉ. जोगेंद्र प्रसाद महतो ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन शिक्षा और संघर्ष की एक अद्भुत मिसाल है। उन्होंने छुआछूत और जातिवाद जैसी कुरीतियों के खिलाफ अकेले दम पर लड़ाई लड़ी और समाज के दबे-कुचले वर्गों को समानता का अधिकार दिलाया। बाबा साहेब ने हमें “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” का जो मंत्र दिया था, वह आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक है।
बाबा साहेब के मुख्य संदेशों पर जोर
कार्यक्रम के दौरान डॉ. महतो ने बाबा साहेब के प्रेरक विचारों को साझा करते हुए कहा:
- शिक्षा का महत्व: पढ़ाई हर इंसान का हक है और यही विकास का एकमात्र मार्ग है।
- महिला सशक्तिकरण: औरतों का विकास ही असल में देश का विकास है।
- जाति मुक्त समाज: इंसान की पहचान उसकी जाति से नहीं बल्कि उसके गुणों से होनी चाहिए। एक जाति-वर्ण रहित समाज ही सच्चा समाज है।
- आत्मविश्वास: अपनी ताकत और मेहनत पर भरोसा रखें, न कि केवल किस्मत पर। मेहनत से बड़ी कोई चीज नहीं होती।

संविधान और लोकतंत्र की रक्षा का संकल्प
डॉ. महतो ने आगे कहा, “बाबा साहेब दुनिया के महानतम अर्थशास्त्री और समाज सुधारक थे, जिन्होंने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा और सशक्त संविधान दिया। आज हम जो आजादी और समानता महसूस कर रहे हैं, वह उनके संघर्षों की ही देन है।”
उन्होंने अंत में सभी को अंबेडकर जयंती की शुभकामनाएं देते हुए ‘जय भीम, जय संविधान, जय लोकतंत्र और जय हिंद’ के नारों के साथ बाबा साहेब के सपनों का भारत बनाने का आह्वान किया।
