
नोवामुंडी/बड़ाजामदा, 16 मार्च: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बड़ाजामदा (रूतागुटू) में सोमवार को ‘माहवारी स्वच्छता प्रबंधन’ पर पांच दिवसीय आशा प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में किशोरियों और महिलाओं को स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है।

मिथकों को तोड़ना और सम्मान बढ़ाना प्राथमिकता
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि सुरक्षित माहवारी स्वच्छता केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान से भी जुड़ा है। समाज में व्याप्त पुरानी गलत धारणाओं और मिथकों को दूर करने के लिए गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाना अनिवार्य है। सही जानकारी के अभाव में किशोरियां अक्सर संक्रमण का शिकार हो जाती हैं, जिसे व्यक्तिगत स्वच्छता अपनाकर रोका जा सकता है।

शिक्षा पर असर: स्कूल छोड़ने की समस्या का समाधान
रिपोर्ट में यह चिंता जताई गई कि जानकारी की कमी के कारण कई लड़कियां माहवारी के दिनों में स्कूल नहीं जातीं या पढ़ाई तक छोड़ देती हैं। प्रशिक्षण में बताया गया कि:
- स्कूलों और घरों में स्वच्छ पानी और साफ शौचालय की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
- सैनिटरी नैपकिन की आसान पहुंच और उसके सुरक्षित निपटान (Disposal) की व्यवस्था हो।
- किशोरियों को शारीरिक और मानसिक परिवर्तनों के प्रति सहज बनाया जाए।

आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका
इस अभियान को सफल बनाने में आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी सेविकाओं और स्वयं सहायता समूहों (SHG) की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया। ये कार्यकर्ता पंचायत स्तर पर महिलाओं तक सही जानकारी पहुँचाने और सुरक्षित साधनों के उपयोग के लिए प्रेरित करेंगी।
प्रशिक्षण के दौरान स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और प्रशिक्षक मौजूद रहे, जिन्होंने समुदाय के सहयोग से लड़कियों के स्वास्थ्य और शिक्षा के स्तर को सुधारने का संकल्प लिया।
