
पलामू/मुंबई: सपनों के शहर मुंबई में जगह बनाना जितना कठिन है, उससे कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण है तीन दशकों तक अपनी पहचान को बनाए रखना। झारखंड के पलामू जिले के एक छोटे से गाँव पोखराहा कला से निकला एक युवक आज बॉलीवुड में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का लोहा मनवा रहा है। यह कहानी है श्रवण ठाकुर की, जिन्होंने अभिनय से शुरुआत कर कोरियोग्राफी और अब निर्देशन के क्षेत्र में एक सफल मुकाम हासिल किया है।

संघर्ष और शुरुआत
श्रवण ठाकुर का प्रारंभिक सपना एक अभिनेता के रूप में विश्व पटल पर छाने का था। उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने छोटे पर्दे से अपने करियर का आगाज किया। उन्होंने चर्चित टीवी सीरियल्स जैसे:
जस्सी जैसी कोई नहीं (सोनी टीवी)
कर्मा (स्टार प्लस)
पीहर (डीडी वन)
जैसे धारावाहिकों के साथ-साथ हिंदी फिल्म ‘मोबाइल फोन’ और ‘किस हद तक’ में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा।
अभिनय से कोरियोग्राफी का सफर
किस्मत ने एक नया मोड़ लिया और श्रवण की रुचि कोरियोग्राफी की ओर बढ़ी। अपनी कलात्मक सोच के दम पर उन्होंने हिंदी और मराठी को मिलाकर लगभग 19 फिल्मों में बतौर कोरियोग्राफर काम किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘अजब सिंह की गज़ब कहानी’, ‘जैकलीन आई एम कमिंग’, ‘चंद्र भागा’, ‘क्या कर दिया तुमने’ और ‘प्यार का सफर’ शामिल हैं।

निर्देशन में कदम और म्यूज़िक वीडियो की धूम
अभिनय और नृत्य के बाद श्रवण ने निर्देशन (Direction) की कमान संभाली। फिल्म ‘प्यार का सफर’, ‘क्या कर दिया तुमने’, शॉर्ट फिल्म ‘हीरोइन’, ‘संकल्प’ और वेब सीरीज ‘अधूरा इश्क’ उनके सफल निर्देशन का प्रमाण हैं।

हाल के दिनों में उनके निर्देशित म्यूज़िक वीडियोज़—’बम भोले बम’, ‘आए हैं तेरे दरबार माँ’, ‘शिव ही मेरे शंभु’ और ‘दर्द भी दीवाना तेरा’—अल्ट्रा, यशी फिल्म्स और टी-सीरीज जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स पर धूम मचा रहे हैं।
30 वर्षों का अनुभव और आने वाला बड़ा प्रोजेक्ट


श्रवण ठाकुर का मानना है कि बॉलीवुड में काम पाना कठिन है, लेकिन टिके रहना उससे भी बड़ी चुनौती है। मायानगरी में 30 वर्ष पूरे कर चुके श्रवण अब एक बड़े स्टार कास्ट वाली अनाम बॉलीवुड फिल्म की तैयारी में जुटे हैं, जिसका प्री-प्रोडक्शन कार्य जोरों पर है।
”पलामू की मिट्टी से जो जुझारूपन मुझे मिला, उसी ने मुझे मुंबई में इतने सालों तक टिके रहने की ताकत दी।” – श्रवण ठाकुर
