
सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत डुमरा पंचायत के डुरांग गांव में स्थित माँ मनसा देवी की पूजा आज भी पूरी शुचिता, श्रद्धा और नियम के साथ की जा रही है, लेकिन हालात भक्तों के मन को व्यथित कर देने वाले हैं। वर्षों पुराना मिट्टी का घर ध्वस्त हो जाने के कारण माँ मनसा देवी की पवित्र मूर्ति फिलहाल खुले में तिरपाल के शामियाना के नीचे स्थापित है।
माँ की सेवा में पिछले 24 वर्षों से लगे पुजारी शिकार मार्डी पूरी निष्ठा और भाव से माँ मनसा देवी की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मिट्टी के घर की जर्जर स्थिति के कारण अब पूजा में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम की मार और अस्थायी व्यवस्था के बीच भी पूजा की शुचिता बनाए रखना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
पुजारी शिकार मार्डी ने बताया कि माँ मनसा देवी का यह स्थल आस्था का एक बड़ा केंद्र है, जहां झारखंड के साथ-साथ बिहार, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल से भी भक्त दर्शन और पूजा के लिए आते हैं। मान्यता है कि यहाँ श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही अटूट विश्वास भक्तों को दूर-दूर से यहाँ खींच लाता है।

माँ के स्थायी और पक्के मंदिर के पुनः निर्माण के लिए पुजारी शिकार मार्डी ने समाज के हर वर्ग से सहयोग की अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर चन्दन कुमार दे, विशाल यादव, अमित सेन, पूर्व वार्ड सदस्य किरण कारवां, सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप कुमार गुड्डू सहित आसपास के क्षेत्र के सभी लोगों से आगे आने का आग्रह किया है।
पुजारी ने भावुक स्वर में कहा कि माँ मनसा देवी को तिरपाल के नीचे देख भक्तों का मन पीड़ा से भर जाता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं और समाजसेवियों से मंदिर के पुनः निर्माण में सहयोग करने की गुहार लगाई है, ताकि माँ को एक पक्का और सुरक्षित धाम मिल सके और भक्तगण निर्बाध रूप से पूजा-अर्चना कर सकें।
