
कांड्रा,
सड़क निर्माण के नाम पर फैली अव्यवस्था और बेतहाशा लापरवाही ने रविवार सुबह एक परिवार की खुशियाँ छीन लीं। हांडीभागा से सुदूर क्षेत्रों तक सड़क निर्माण कार्य कर रही लीडिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी की गिट्टी लदी एक तेज रफ्तार हाईवा सुबह करीब 4:30 बजे पालोबेड़ा के पास अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसा इतना भयावह था कि भारी वाहन सड़क किनारे बने एक घर पर जा गिरा, जिसमें सो रहे 30 वर्षीय बीरबल मुर्मू और उनकी डेढ़ वर्षीय बेटी अनुश्री मुर्मू की मलबे में दबकर दर्दनाक मौत हो गई। बीरबल की पत्नी गंभीर रूप से घायल हैं, जिन्हें कांड्रा थाना पुलिस ने तुरंत अस्पताल भेजा।
सूचना मिलते ही कांड्रा थाना प्रभारी विनोद कुमार मुर्मू दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे और राहत व बचाव कार्य में जुट गए। गांव में शोक तो है ही, लेकिन उससे बड़ा उबाल है, क्योंकि यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की खुली नाकामी और अनदेखी का परिणाम बताई जा रही है।
*सड़क निर्माण में पारदर्शिता शून्य, न शिलापट्ट, न विभाग की जानकारी, न ठेकेदार का नाम*
स्थानीय ग्रामीणों ने खुलासा किया है कि जिस सड़क पर काम हो रहा है, उस पर किस विभाग द्वारा निर्माण कराया जा रहा है, ठेकेदार कौन है, इस्टीमेट कितना है , इनमें से किसी भी बात की सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। न कहीं शिलापट्ट लगा है, न कार्यस्थल पर कोई बोर्ड। सब कुछ परदे के पीछे, गोपनीय तरीके से चल रहा है। ऐसे में ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं: “जब काम ही अंधेरे में होगा, तो जवाबदेही की रोशनी किससे मांगी जाए?”
उबड़-खाबड़ सड़क और तेज रफ्तार, एक खतरनाक गठजोड़*
ग्रामीण सड़कें वैसे ही संकरी और गड्ढों से भरी होती हैं। उस पर गिट्टी लदे बड़े वाहनों की तेज रफ्तार ने कई बार खतरा बढ़ाया है। इस घटना में भी आशंका जताई जा रही है कि स्टोन चिप्स का वैध माइनिंग चालान मौजूद नहीं रहा होगा। वाहन की लोडिंग आधी रात के बाद चोरी छिपे की गई होगी। ड्राइवर नींद में झपकी ले रहा होगा या सम्भवतः खलासी गाड़ी चला रहा था। इन सभी पहलुओं की जांच की जरूरत है, लेकिन संबंधित विभाग की चुप्पी टुटेगी?
*गांव में आक्रोश, “मौत के सौदागर” बताई जा रही है निर्माण कंपनी*
घटना के बाद पूरे पालोबेड़ा में शोक के साथ गहरा गुस्सा फैल गया है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण कंपनी पर खुलकर लापरवाही और मनमानी का आरोप लगाया है। हुदू पंचायत की मुखिया भी घटनास्थल पर पहुंचीं और पीड़ित परिवार को न्याय व उचित मुआवजे की मांग की। दो जानें चली गईं, एक परिवार बिखर गया, लेकिन क्या सरकारी तंत्र की नींद खुलेगी? या फिर झारखंड में सड़क निर्माण के नाम पर यह मौत का सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?