
नोवामुंडी संवाददाता, 15 नवंबर:
आदिवासी अस्मिता, गर्व और वीरता के प्रतीक भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती एवं जनजातीय गौरव दिवस पर बुधवार को नोवामुंडी प्रखंड का आदिवासी एसोसिएशन भवन परिसर श्रद्धा और उत्साह से सराबोर रहा। सुबह-सवेरे निकली प्रभात फेरी से लेकर देर शाम तक चले सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने क्षेत्र में बिरसा चेतना का ऐसा वातावरण रचा कि हर आंख गर्व से चमक उठी।

भगवान बिरसा की प्रतिमा पर श्रद्धा-सुमन, गूंजा ‘जय बिरसा’
कार्यक्रम की शुरुआत प्रभात फेरी से हुई, जिसमें समुदाय के लोग पारंपरिक वेशभूषा और उत्साह के साथ शामिल हुए। शहर के मुख्य मार्गों से गुजरती यह प्रभात फेरी आदिवासी भवन पहुँचकर मुख्य समारोह में परिवर्तित हो गई।

मुख्य अतिथि टाटा स्टील प्रशासनिक विभाग के अधिकारी निशिकांत सिंह ने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा, आदिवासी एसोसिएशन के अध्यक्ष घनश्याम हेम्ब्रम, सभी मांनकी-मुंडा और उपस्थित ग्रामीणों ने भी पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। पारंपरिक पूजा-अर्चना के साथ बिरसा मुंडा के संघर्ष, बलिदान और आदिवासी अधिकारों की अलख को याद किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने खींचा सबका ध्यान, झलक उठी आदिवासी पहचान
प्रतिमा वंदन के बाद आदिवासी भवन में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई।
डीएवी स्कूल के छात्र-छात्राओं ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
स्थानीय डांस ग्रुप के बच्चों ने भी जोशपूर्ण प्रस्तुति देकर सभी को थिरकने पर मजबूर कर दिया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान मांदर की थाप, पारंपरिक गीत, नृत्य और जनजातीय संस्कृति की सुगंध वातावरण में घुली रही।
बिरसा की जीवनी पर प्रेरक भाषणों ने जगाई चेतना
कार्यक्रम में वक्ताओं ने बिरसा मुंडा के जीवन संघर्ष, उनके नेतृत्व, अंग्रेजी सत्ता के विरुद्ध जनउभार और आदिवासी अधिकारों की लड़ाई पर सारगर्भित विचार रखे। वक्ताओं के संदेश ने युवाओं को प्रेरित करते हुए बिरसा के आदर्शों को अपनाने का संकल्प दिलाया।
मंच से गूँजी प्रेरक आवाज़ें: बिरसा के आदर्शों से लेकर युवाओं के भविष्य तक पर गहन विचार
मुख्य अतिथि निशिकांत सिंह ने मंच से संबोधित करते हुए भगवान बिरसा मुंडा की जीवनी और उनके अद्वितीय बलिदान को भावपूर्ण शब्दों में याद किया। उन्होंने कहा कि “बिरसा मुंडा केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, बल्कि आदिवासी स्वाभिमान, संघर्ष और आत्मसम्मान के शाश्वत प्रतीक थे।” उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि बिरसा की वीरता, नेतृत्व क्षमता और संघर्ष की भावना को अपनी जीवनशैली में शामिल करें, क्योंकि यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इसके बाद पूर्व विधायक मंगल सिंह बोबोंगा ने अपने उद्बोधन में बिरसा मुंडा के आन्दोलन, उनके आत्मबल और समाज को एकजुट करने की क्षमता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बिरसा के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने स्वतंत्रता संघर्ष के समय थे। बोबोंगा ने कहा—
“उनके आदर्श हमें अन्याय का सामना करने, अपनी पहचान बचाने और समाज के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने की प्रेरणा देते हैं। आज का युवा यदि बिरसा की राह पर चले तो समाज में सकारात्मक बदलाव निश्चित है।”
“पलायन रोकना होगा”—सृजन 5.0 के शंकर चातोम्बा का भावपूर्ण संदेश
कार्यक्रम में सृजन 5.0 के प्रतिनिधि शंकर चातोम्बा ने युवाओं के पलायन को गंभीर समस्या बताते हुए बेहद विचारोत्तेजक संबोधन दिया। उनके शब्दों ने सभागार में मौजूद हर श्रोता को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा—
“लड़के तो पलायन करते ही हैं, लेकिन अब लड़कियाँ भी शहरों की ओर जा रही हैं। यह स्थिति सुरक्षा, संस्कृति और समाज—तीनों के लिए चिंता का विषय है। अपने गांव-घर से बढ़कर सुरक्षित कोई स्थान नहीं। इसलिए जरूरी है कि युवा गांव में ही रहकर विकास का रास्ता खोजें, खेती, स्वरोजगार और योजनाओं के जरिए अपनी पहचान मजबूत करें।”
चातोम्बा ने युवाओं से अपील की कि वे अपने कौशल और प्रतिभा का उपयोग गांव के विकास में करें और पलायन के कारण कमजोर होती सामाजिक संरचना को मजबूत बनाएं।
