
सेंट मैरी स्कूल में शिक्षक दिवस पर संस्कारों की खुशबू से महका परिसर, आरती-तिलक से गुरुजनों का अभिनंदन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
प्रतिनिधि, नोवामुंडी।
गुरु के प्रति श्रद्धा, शिष्य के मन में सम्मान और सिर पर गुरुजनों का आशीर्वाद—शिक्षक दिवस पर शनिवार को सेंट मैरी स्कूल, नोवामुंडी में इन भावनाओं का खूबसूरत संगम देखने को मिला। पूरा विद्यालय परिसर उत्साह, उमंग और आत्मीयता से सराबोर रहा। विद्यार्थियों ने अपने गुरुजनों के सम्मान में ऐसी प्रस्तुतियां दीं, जिनमें उनकी प्रतिभा के साथ संस्कार और कृतज्ञता भी साफ झलकी।

समारोह की शुरुआत भारतीय संस्कृति और परंपरा के अनुरूप शिक्षकों की आरती उतारकर और तिलक लगाकर की गई। विद्यार्थियों ने पारंपरिक तरीके से गुरुजनों का अभिनंदन किया। सम्मान के इस पल में गुरु और शिष्य के बीच का आत्मीय रिश्ता सहज ही दिखाई दिया। बच्चों के चेहरे पर अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान था तो गुरुजनों की आंखों में अपने शिष्यों के लिए स्नेह और गर्व।
प्रतिभा के मंच पर बच्चों ने बिखेरे रंग

इसके बाद विद्यार्थियों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। समूह नृत्य और सुरीले गीतों से लेकर कविता पाठ तक, हर प्रस्तुति ने दर्शकों का मन मोह लिया। बच्चों के आत्मविश्वास और शानदार प्रदर्शन पर पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा।
इन प्रस्तुतियों में मनोरंजन के साथ एक संदेश भी छिपा था—जिस गुरु से सीखकर शिष्य आगे बढ़ता है, उसके प्रति सम्मान व्यक्त करना भी शिक्षा और संस्कार का ही हिस्सा है।
नाटक ने दिखाई गुरु की भूमिका
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नाटक रहा। नाटक के माध्यम से बच्चों ने समाज और राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की भूमिका को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। प्रस्तुति में बताया गया कि शिक्षक सिर्फ किताबों का पाठ नहीं पढ़ाते, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन की राह चुनने, कठिनाइयों से जूझने और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने का हौसला भी देते हैं।
नाटक की प्रस्तुति ने दर्शकों को भावुक किया और गुरु के महत्व पर सोचने के लिए प्रेरित किया। प्रस्तुति के बाद सभागार तालियों से गूंज उठा।

कविता में छलका गुरु के प्रति आभार
कविता पाठ के दौरान विद्यार्थियों ने भावपूर्ण कविताओं के माध्यम से अपने शिक्षकों के प्रति प्रेम, सम्मान और आभार व्यक्त किया। बच्चों के शब्दों में गुरु के प्रति श्रद्धा थी और भावनाओं में अपनापन।
विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों से साफ महसूस हुआ कि शिक्षक उनके लिए केवल कक्षा में पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं, बल्कि सही राह दिखाने वाले मार्गदर्शक और भविष्य को आकार देने वाले प्रेरणास्रोत हैं।
गुरु का आशीर्वाद बना बच्चों की ताकत
समारोह के दौरान शिक्षकों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की जमकर सराहना की और उनका उत्साह बढ़ाया। शिक्षकों ने बच्चों को मेहनत, अनुशासन, ईमानदारी और अच्छे संस्कारों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। साथ ही उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद दिया।
गुरुजनों का आशीर्वाद पाकर विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे। यह पल मानो उस विश्वास की तस्वीर बन गया, जिसमें शिष्य को अपनी मंजिल की ओर बढ़ने का आत्मविश्वास गुरु के मार्गदर्शन से मिलता है।
सम्मान और स्नेह से मजबूत हुआ गुरु-शिष्य का बंधन
शिक्षक दिवस का यह समारोह सिर्फ एक आयोजन बनकर नहीं रहा, बल्कि गुरु-शिष्य के रिश्ते की खूबसूरती को महसूस कराने वाला अवसर बन गया। विद्यार्थियों ने जहां अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता जताई, वहीं शिक्षकों ने स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद से अपने शिष्यों का हौसला बढ़ाया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट, बच्चों की मुस्कान और गुरुजनों के स्नेह से गूंजता रहा।
समारोह ने एक गहरा संदेश दिया कि गुरु का सम्मान करना शिष्य के संस्कार की पहचान है और गुरु का आशीर्वाद उसके आत्मविश्वास की ताकत। शिक्षा की असली सार्थकता तभी है, जब ज्ञान के साथ सम्मान, अनुशासन और संस्कार भी जीवन का हिस्सा बनें।
सेंट मैरी स्कूल में मनाया गया शिक्षक दिवस इसी खूबसूरत भावना का जीवंत उदाहरण बना—शिष्यों ने सम्मान से सिर झुकाया, गुरुजनों ने आशीर्वाद से हाथ उठाए और दोनों के बीच विश्वास का रिश्ता और मजबूत हो गया
