
संवाददाता, नोवामुंडी
मंगलवार सुबह हुई मूसलाधार बारिश ने नोवामुंडी की बदहाल जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी.सुबह स्कूल खुलने के समय हुई तेज बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में दो से तीन फीट तक पानी भर गया.इसका सबसे अधिक असर स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों पर पड़ा, जिन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा.
बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि वे अपने जूते-मोजे बचाएं, स्कूल ड्रेस बचाएं या खुद को सुरक्षित रखते हुए स्कूल पहुंचें। कई बच्चे जूते और मोजे हाथ में लेकर पानी से भरी सड़कों को पार करते नजर आए, जबकि कई बच्चों की स्कूल ड्रेस पूरी तरह भीग गई। छोटे-छोटे बच्चे तेज बहाव और जलजमाव के बीच किसी तरह संतुलन बनाकर स्कूल पहुंचे.

परेशानी टाटा स्टील परिसर संग्राम साईं सेंट मैरी स्कूल के मुख्य द्वार के पास देखने को मिली.स्कूल गेट से लगभग 500 मीटर तक सड़क पर जलजमाव हो गया और जगह-जगह बने गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और भी खतरनाक हो गई। छुट्टी के समय स्कूल की प्रिंसिपल स्वयं मुख्य द्वार पर खड़ी होकर बच्चों को सुरक्षित सड़क पार कराती नजर आईं, ताकि कोई बच्चा फिसलकर घायल न हो। कई अभिभावक भी अपने छोटे बच्चों को गोद में उठाकर पानी से भरे रास्ते पार कराते दिखाई दिए.
शिशु मंदिर स्कूल का हाल भी हर साल बरसात में सबसे खराब रहता है.स्कूल तक जाने वाली सड़क से लेकर मुख्य द्वार तक बारिश के दिनों में तालाब जैसी स्थिति बन जाती है.जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण छोटे से लेकर बड़े बच्चों तक सभी को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बच्चे एक हाथ में जूते-मोजे और दूसरे हाथ से संतुलन बनाते हुए स्कूल पहुंचे, जबकि कई अभिभावक अपने बच्चों को गोद में उठाकर स्कूल के मुख्य द्वार तक ले गए.

बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए शिशु मंदिर की प्रिंसिपल सीमा पालित स्वयं अपने शिक्षकों के साथ बारिश के बीच सड़क पर खड़ी रहीं और बच्चों को पानी से भरी गली सुरक्षित पार कराती रहीं, ताकि कोई भी बच्चा फिसलकर पानी में न गिर जाए.शिक्षकों की यह संवेदनशील पहल अभिभावकों के बीच सराहना का विषय बनी रही.
स्थानीय लोगों का कहना है कि शिशु मंदिर स्कूल के बाहर की यह समस्या नई नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी है। हर साल बरसात में स्कूल तक जाने वाली सड़क और मुख्य द्वार के सामने भारी जलजमाव हो जाता है.इसके बावजूद आज तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। बारिश के दिनों में सड़क तालाब का रूप ले लेती है, जिससे बच्चों को जान जोखिम में डालकर स्कूल जाना पड़ता है.ऐसे में बच्चों के सामने यह चिंता रहती है कि वे अपनी किताबें, स्कूल ड्रेस और जूते-मोजे बचाएं या खुद को सुरक्षित रखें.
वहीं मध्य विद्यालय नोवामुंडी बाजार का परिसर और आसपास का इलाका भी किसी तालाब से कम नहीं दिखा। जल निकासी व्यवस्था सही नहीं होने के कारण पूरा क्षेत्र पानी में डूब गया, जिससे छात्रों और शिक्षकों को स्कूल आने-जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बरसात के मौसम में जल निकासी व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए और स्कूलों के आसपास होने वाले जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। उनका कहना है कि जब तक बच्चों के स्कूल आने-जाने का रास्ता सुरक्षित नहीं होगा, तब तक वे निश्चिंत होकर पढ़ाई नहीं कर पाएंगे। बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा को देखते हुए प्रशासन को इस गंभीर समस्या पर शीघ्र ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है.
