
नोवामुंडी कॉलेज में प्राचार्य डॉ. मनोजीत विश्वास के निर्देशानुसार इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष श्रीमती सुमन चातोम्बा की ओर से “झारखंड में विस्थापन : एक चुनौती” विषय पर विभागीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने भाग लिया।
सेमिनार में बिरसा सरदार, शाहिन परवीन, निकिता चातोम्बा, अंकिता गोप, पूनम जेराई सहित लगभग 25 छात्र-छात्राओं ने विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने झारखंड में विस्थापन की समस्या, रोजगार, शिक्षा, खनन क्षेत्र तथा सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों पर विस्तार से चर्चा की।
अपने संबोधन में प्राचार्य डॉ. मनोजीत विश्वास ने कहा कि खनिज संपदा एवं प्राकृतिक संसाधनों से सम्पन्न झारखंड में विस्थापन आज एक गंभीर चुनौती बन चुका है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव आदिवासी समाज पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा की कमी और जागरूकता के अभाव में लोग अपने अधिकारों को न तो ठीक से समझ पाते हैं और न ही उनकी रक्षा कर पाते हैं। अशिक्षा के कारण वे सही मार्गदर्शक और नेतृत्वकर्ता का चयन करने में भी पीछे रह जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें रोजगार की तलाश में अन्य राज्यों की ओर पलायन करना पड़ता है।
उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि विस्थापन जैसी समस्याओं से बचना है तो शिक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। पढ़-लिखकर कानून और अपने अधिकारों को समझना आवश्यक है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर कानूनी रूप से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया जा सके। उन्होंने कहा कि रोजगार, उद्योग एवं विकास परियोजनाओं के कारण राज्य की बड़ी आबादी अपने घर-गांव छोड़ने को विवश है। इस समस्या के समाधान के लिए शिक्षा, स्थानीय रोजगार और सामाजिक जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए विस्थापन के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक प्रभावों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में डॉ. मुकेश कुमार सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा की गई।
इस अवसर पर महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक परमानंद महतो, साबिद हुसैन, कुलजिंदर सिंह, डॉ. मुकेश कुमार सिंह, दिवाकर गोप, डॉ. क्रांति प्रकाश, तन्मय मंडल, संतोष पाठक, धनीराम महतो, भवानी कुमारी, शांति पुरती, सुमन चातोम्बा, हीरा चातोम्बा, मंजू लता सिंकु सहित काफी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे।
