
आनंद मार्ग प्रचारक संघ की ओर से साकची में शुक्रवार को आदर्श विवाह का पावन आयोजन सम्पन्न हुआ। इस विशेष वैवाहिक कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत रही कि पूरे विवाह संस्कार को आनंद मार्ग की महिला पुरोहित तात्विक डॉ. आशु ने वैदिक विधि के साथ सम्पन्न कराया, जो महिला सशक्तिकरण और समान अधिकारों का सशक्त संदेश देता है।इस आदर्श विवाह में वधू पक्ष की ओर से तनिषा प्रिया, सुपुत्री बृजेंद्र कुमार बृजेश (कटिहार), और वर पक्ष की ओर से प्रणव कुमार, सुपुत्र देवेंद्र कुमार सिंह (सब-इंस्पेक्टर, गिरिडीह, झारखंड) ने वैदिक मंत्र “ॐ मधु वाता ऋतायते…” के तीन बार मंत्रोच्चार कर वैवाहिक बंधन को पूर्ण किया।कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने समाज को साक्षी मानते हुए परमब्रह्म तथा मार्ग गुरुदेव के नाम पर नवविवाहित युगल के सुखमय जीवन की सामूहिक कामना की। वर व वधू ने पारस्परिक सम्मान और समानता के प्रतीक रूप में तीन बार माला का आदान-प्रदान कर एक-दूसरे के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई।दहेज-मुक्त विवाह का संदेश
आनंद मार्ग में दहेज प्रथा को स्थान नहीं है। विवाह में दोनों परिवारों की पूर्ण सहमति और समान विचारधारा को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है। इसी भावना को केंद्र में रखते हुए इस विवाह को आदर्श पद्धति से सम्पन्न कराया गया।महिला पौरोहित्य के महत्व पर डॉ. आशु का संदेश तात्विक डॉक्टर आशु ने कहा कि महिलाएं केवल आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी सशक्त हों, इसके लिए धार्मिक अनुष्ठानों में भी उन्हें समान अधिकार मिलना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि समाज में अब समय आ गया है कि महिलाएं केवल पौरोहित्य ही नहीं, बल्कि विवाह, श्राद्ध, दाह-संस्कार जैसे सभी संस्कारिक कृत्यों को सम्पन्न करने का अधिकार प्राप्त करें। उन्होंने बताया कि आनंद मार्ग के संस्थापक श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने महिला पौरोहित्य का मार्ग प्रशस्त कर महिलाओं के सर्वांगीण उत्थान का द्वार खोला। समाज के दोनों पहियों, पुरुष और महिला को समान अधिकार दिए बिना विकास संभव नहीं है। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने नवदंपति के लिए मंगलकामनाएँ दीं और महिला नेतृत्व में सम्पन्न इस अनूठे विवाह को समाज में सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक बताया।