
नोवामुंडी, 31 जुलाई (गुरुवार) को
नोवामुंडी कॉलेज में हिन्दी विभाग द्वारा हिन्दी साहित्य के दो महान विभूतियों—गोस्वामी तुलसीदास की 528वीं जयंती एवं उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 145वीं जयंती को हर्षोल्लास एवं श्रद्धा के साथ मनाया गया। यह कार्यक्रम प्राचार्य डॉ. मनोजित विश्वास के निर्देशन में सहायक प्राध्यापक परमानंद महतो की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत दोनों साहित्य मनीषियों के चित्रों पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुई, जिसमें कॉलेज के सभी शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर अध्यक्षता कर रहे परमानंद महतो ने कहा कि जहाँ तुलसीदास ने भक्ति और अध्यात्म के माध्यम से मानव जीवन को आदर्श मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी, वहीं प्रेमचंद ने अपने यथार्थवादी साहित्य के माध्यम से समाज को आईना दिखाया। उन्होंने कहा कि तुलसीदास की रामचरितमानस भारतीय आस्था की अमूल्य धरोहर है, जबकि प्रेमचंद ने अपने उपन्यासों और कहानियों में समाज के वंचित, पीड़ित और शोषित वर्ग की पीड़ा को शब्द देकर साहित्य को ज़मीनी स्तर पर प्रतिष्ठित किया।
कॉलेज के प्रोफेसर धनीराम महतो ने प्रेमचंद और तुलसीदास के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए विशेष रूप से प्रेमचंद की कालजयी कहानी पूस की रात का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस कहानी में प्रेमचंद ने भारतीय ग्रामीण जीवन के अभाव, संघर्ष और करुणा को अत्यंत मार्मिकता से चित्रित किया है। पूस की रात का नायक हल्कू ठंड से ठिठुरता हुआ अपने खेत की रखवाली करता है, लेकिन उसके पास पर्याप्त गर्म कपड़े तक नहीं हैं। यह कहानी केवल एक किसान की पीड़ा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह है जहाँ किसान जीवन भर मेहनत करता है लेकिन बदले में उसे केवल दुःख और अभाव ही मिलते हैं। उन्होंने कहा कि कहा कि प्रेमचंद के साहित्य को पढ़े बिना भारतीय समाज को पूरी तरह समझा नहीं जा सकता। पूस की रात जैसी कहानियाँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी अपने समय में थीं।

कार्यक्रम में सभी विभागों के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने दोनों साहित्यकारों के जीवन और साहित्य पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का संचालन कॉलेज के हिन्दी विभाग द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में पाठ्यक्रम आधारित साहित्यिक चेतना, रचनात्मक अभिव्यक्ति की क्षमता तथा सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित करना था।
इस अवसर पर सहायक प्राध्यापक साबिद हुसैन, डॉ. मुकेश कुमार सिंह, दिवाकर गोप, राजकरण यादव, कुलजिंदर सिंह, संतोष पाठक, नरेश कुमार पान, तन्मय मंडल, डॉ. क्रांति प्रकाश, शान्ति पुरती, सुमन चातोम्बा, हीरा चातोम्बा, सीमा गोप, मंजू लता सिकु, प्रतिभा सोमकुंवर टीकाराम जी, दयानिधि प्रधान, जगन्नाथ प्रधान, रामबहादुर चौधरी, अनिमेष बिरूली, गुरु चरण बालमुचू आदि उपस्थित थे।
