
बड़ाबालजोड़ी। षिरजोन 6.0 कार्यक्रम का अंतिम दिन उत्साह, रोमांच और जनजातीय संस्कृति के अद्भुत संगम के बीच भव्य रूप से संपन्न हुआ। बड़ाबालजोड़ी मैदान में आयोजित इस चार दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन हजारों दर्शकों की उपस्थिति ने आयोजन को और भी यादगार बना दिया। मैदान में सुबह से ही दर्शकों और अतिथियों की भीड़ जुटने लगी थी। जनजातीय खेलों के रोमांचक मुकाबलों ने पूरे माहौल को उत्साह से भर दिया।
कार्यक्रम के अंतिम दिन हो समाज की पारंपरिक खेल-कूद, भाषा, संस्कृति, रीति-रिवाज और सामाजिक विरासत को प्रदर्शित करते हुए कई जनजातीय खेलों का आयोजन किया गया। इनमें चूर, सेकोर, पीटु, तीरंदाजी, बाबा रूंङ, गुरतुई सेगेंल, किते गलंङ, जोनओ गलंङ सहित फुटबॉल के मुकाबले प्रमुख रूप से शामिल रहे। पारंपरिक खेलों में प्रतिभागियों के कौशल, साहस और प्रतिस्पर्धा की भावना ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।

षिरजोन 6.0 केवल खेल प्रतियोगिताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इस मंच के माध्यम से हो समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक एकजुटता को भी प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित कर उनके कार्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
इस भव्य आयोजन में टाटा क्षेत्र, चक्रधरपुर, चाईबासा, रांची सहित झारखंड के विभिन्न इलाकों से तथा ओडिशा और पश्चिम बंगाल से सैकड़ों अतिथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। विभिन्न क्षेत्रों से आए अतिथियों, समाज के प्रतिनिधियों और दर्शकों की भागीदारी ने कार्यक्रम को व्यापक सामाजिक पहचान प्रदान की।

षिरजोन 6.0 का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और पारंपरिक खेलों को संरक्षित करना केवल वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य और पहचान से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे आयोजन समाज के लोगों को एक मंच पर लाकर आपसी एकता, सहयोग और सांस्कृतिक गौरव को मजबूत करते हैं।
