
बड़ाबालजोड़ी। षिरजोन 6.0 कार्यक्रम के तीसरे दिन बड़ाबालजोड़ी मैदान जनजातीय खेलों एवं सांस्कृतिक गतिविधियों से गुलजार रहा। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से अतिथियों का लगातार आगमन होता रहा। तीसरे दिन भी बड़ी संख्या में समाज के लोगों, युवाओं एवं सदस्यों की उपस्थिति ने आयोजन को उत्साहपूर्ण बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान आदिवासी हो समाज के पारंपरिक खेलों एवं सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रूतु, मचिला गंडू, ओरोंग, चूर इनुङ, पीटु इनुङ, सेकोर इनुङ और बनम गेड सहित विभिन्न पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया। इन खेलों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी पारंपरिक खेल संस्कृति से जोड़ने तथा सामाजिक एकता को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
विभिन्न खेलों में प्रतिभागियों ने दिखाया दमखम

तीसरे दिन आयोजित खेल प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। रूतु ओरोंग प्रतियोगिता में मोहन जेराई ने प्रथम तथा रमेश सुंडी ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। वहीं, बमन साड़ी प्रतियोगिता में रमेश सुंडी प्रथम और जयराम कुंकल द्वितीय स्थान पर रहे। मचिला गंडू प्रतियोगिता में रोया पूर्ति ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं के प्रतिनिधि हुए शामिल
कार्यक्रम में जोहार ट्रस्ट की टीम, आदिवासी हो समाज युवा महासभा की टीम, रवींद्र बाल संस्कार स्कूल की टीम, जुरेंद्र मेमोरियल स्कूल की टीम तथा आयूब स्कूल की टीम सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इस अवसर पर कोटगढ़ पीढ़ के मानकी सुरेंद्र चातोम्बा सहित अन्य अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई।
षिरजोन कमेटी के सदस्यों ने संभाली जिम्मेदारी
कार्यक्रम को सफल बनाने में षिरजोन कमेटी के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस दौरान बुधराम चाम्पिया, गोरा लागुरी, बुधलाल पूर्ति, जगमोहन हेस्सा, रोया लागुरी, चंद्रमोहन चातोम्बा, टमरजीत लागुरी, श्रीराम बारजो, बुधन लागुरी और राउतु हेम्ब्रम सहित सैकड़ों सदस्य उपस्थित रहे।

षिरजोन 6.0 के माध्यम से आदिवासी हो समाज की पारंपरिक खेल विधाओं, भाषा, संस्कृति एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम समाज के लोगों को एक मंच पर लाकर आपसी एकता, सहयोग और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
