
प्रतिनिधि, नोवामुंडी।जहां आम दिनों में पहुंचना भी किसी चुनौती से कम नहीं, वहां संकट की घड़ी में जनप्रतिनिधि खुद ग्रामीणों के बीच पहुंचे तो यह सिर्फ राहत नहीं, बल्कि भरोसे की मजबूत डोर बन जाती है। नोवामुंडी प्रखंड मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर दूर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र जोजो कबीर और रेबेड लोवा गांव में जिला परिषद अध्यक्ष लक्ष्मी सुरेन ने पहुंचकर हाथियों के उत्पात से प्रभावित परिवारों के बीच त्रिपाल का वितरण किया.जंगल से सटे इन गांवों में हाथियों के झुंड ने कई ग्रामीणों के घरों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है.घरों की छत और दीवारें टूटने से प्रभावित परिवारों के सामने बारिश और धूप से बचाव की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।


ऐसे समय में लक्ष्मी सुरेन ने स्वयं गांव पहुंचकर पीड़ित ग्रामीणों का हाल जाना और उन्हें तत्काल राहत के तौर पर त्रिपाल उपलब्ध कराया।प्रभावित ग्रामीणों में दामु पुरती पिता रुगुडिया पुरती, सुरीन सिंकू पिता डुरसु सिंकू, सोमा सिंकू पिता गोदा सिंकू, डुरसु सिंकू पिता शंभु सिंकू, मुदु सिंकू पिता मंगीला सिंकू, गर्दी सिंकू पिता लंका सिंकू एवं शंभु सिंकू पिता गोरा सिंकू शामिल हैं।जिप अध्यक्ष ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि जिन परिवारों के घर हाथियों के हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनके आवास की मरम्मत की व्यवस्था के लिए आवश्यक पहल की जाएगी.

उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को करीब से सुना और हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया.खास बात यह रही कि इससे पहले भी लक्ष्मी सुरेन स्वयं करीब 22 किलोमीटर दूर इसी सुदूर क्षेत्र में पहुंचकर हाथी प्रभावित ग्रामीणों के बीच चावल का वितरण कर चुकी हैं। लगातार प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर राहत उपलब्ध कराने से ग्रामीणों ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के लगातार गांव की ओर आने से उनके बीच भय का माहौल है।

घर टूटने के बाद परिवारों की परेशानी और बढ़ गई है। ऐसे में सुदूर जंगल क्षेत्र तक पहुंचकर जनप्रतिनिधि द्वारा उनकी सुध लेना उनके लिए बड़ी राहत और हिम्मत का विषय है।दुर्गम रास्तों और जंगलों के बीच 22 किलोमीटर का सफर तय कर ग्रामीणों के बीच पहुंची लक्ष्मी सुरेन की यह पहल बताती है कि जनसेवा की असली तस्वीर वहीं दिखाई देती है, जहां जरूरत सबसे ज्यादा और सुविधाएं सबसे कम होती हैं।
