
जमशेदपुर, 2 अगस्त 2026 बहुभाषीय साहित्यिक संस्था ‘सहयोग’ एवं विद्यादीप फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में 1 अगस्त को ‘वीणा रानी पवन स्मृति सम्मान समारोह’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति, नृत्य, संगीत एवं रंगमंच की विविध प्रस्तुतियों के माध्यम से कला और साहित्य के प्रति समर्पण को रेखांकित किया गया। समारोह में साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को विभिन्न सम्मान प्रदान कर उनके योगदान को नमन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. पद्मा झा द्वारा प्रस्तुत ‘सहयोग गीत’ से हुआ। इसके पश्चात डी.बी.एम.एस. कॉलेज फॉर एजुकेशन की ओर से पंचतत्व पर केंद्रित मनोहारी नृत्य प्रस्तुति दी गई। इस प्रस्तुति का निर्देशन पामेला घोष दत्ता ने किया, जबकि नृत्यांगनाओं के रूप में सुमेधा दत्ता, तृषा सरकार, आकांक्षा दास, मौमिता चक्रवर्ती एवं सुप्रीति दास ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह में अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर तथा माँ सरस्वती एवं अम्मा की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया गया। अतिथियों का मंच पर अध्यक्ष, सचिव एवं परिजात सौरभ के साथ आगमन हुआ। संस्था की ओर से अतिथियों का अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर स्वागत किया गया। इसके बाद उपासना सिन्हा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।

सहयोग संस्था की अध्यक्ष डॉ. संध्या सिन्हा ने स्वागत वक्तव्य देते हुए संस्था के उद्देश्यों एवं उसकी साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों पर प्रकाश डाला। अम्मा की छात्रा डॉ. अनिता राकेश ने अम्मा के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को स्मरण करते हुए उनके प्रति अपने उद्गार व्यक्त किए। इस अवसर पर डॉ. अनिता राकेश एवं सचिव डॉ. भारती द्वारा ‘सहयोग निधि सम्मान’ प्रदान किया गया।
समारोह की विशिष्ट अतिथि डॉ. मीरा मुंडा ने अपने उद्बोधन में साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया। इसके पश्चात डॉ. जूही समर्पिता के सहयोग से ‘साहित्य सृजन सम्मान’ प्रदान किया गया। मुख्य अतिथि सरयू राय, विधायक, पश्चिमी सिंहभूम ने अपने संस्मरणीय उद्बोधन में साहित्य एवं कला को समाज की संवेदनशील चेतना का आधार बताते हुए ऐसे आयोजनों की महत्ता को रेखांकित किया।
समारोह का प्रमुख आकर्षण ‘वैदुष्यमणि डॉ. वीणा रानी सम्मान’ रहा, जिसे मुख्य अतिथि सरयू राय एवं परिजात सौरभ द्वारा प्रदान किया गया। वहीं ‘डॉ. वीणा रानी ‘प्रभा’ सम्मान’ विशिष्ट अतिथि डॉ. मीरा मुंडा एवं परिजात सौरभ द्वारा प्रदान किया गया। सम्मान समारोह के पश्चात अतिथियों ने मंच से दर्शन दीर्घा में स्थान ग्रहण किया।
कार्यक्रम के सांस्कृतिक सत्र में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की कालजयी कृति ‘उर्वशी’ के एक अंश का प्रस्तुतिकरण किया गया, जिसका परिचय डॉ. रागिनी भूषण ने दिया। इसके बाद जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी की छात्राओं द्वारा ‘उर्वशी’ पर आधारित भव्य नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की गई। नृत्य-नाटिका की पटकथा एवं संवाद लेखन डॉ. रागिनी भूषण, गीत एवं पृष्ठभूमि संगीत निर्माण मसूर सिद्दीकी, नाट्य निर्देशन अवतार सिंह तथा नृत्य निर्देशन सुधा दीप ने किया। प्रस्तुति में आद्या झा, सिमरन झा, परिधि पंडित, अनुष्का गुप्ता, परी महतो, अन्वेषा महतो, मान्विका कीर्ति श्री, चिनापानी तमन्ना रेड्डी, शिवम कुमार सिंह, अदिति झा, श्रुति शर्मा, अर्पिता डे, निवेदिता महापात्र एवं समरजीत गुप्ता सहित छात्राओं ने प्रभावशाली अभिनय एवं नृत्य प्रस्तुत किया।
नृत्य-नाटिका की शानदार प्रस्तुति के पश्चात सभी नृत्यांगनाओं एवं निर्देशकों को सम्मानित किया गया। सम्मान प्रदान करने वालों में मुख्य अतिथि सरयू राय, विशिष्ट अतिथि डॉ. मीरा मुंडा, सम्मानित अतिथि डॉ. अनिता राकेश एवं परिजात सौरभ शामिल रहे। इस अवसर पर संस्था की अध्यक्ष एवं सचिव ने भी सम्मान समारोह में सहयोग प्रदान किया।
अंत में सहयोग की सचिव डॉ. भारती कुमारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, सम्मानित व्यक्तित्वों, कलाकारों, निर्देशकों, सहयोगियों एवं उपस्थित दर्शकों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ तथा इसके साथ ही समारोह के समापन की घोषणा की गई।
समारोह ने साहित्य, कला एवं संस्कृति के विविध आयामों को एक मंच पर लाकर न केवल दिवंगत साहित्यकार एवं शिक्षाविद् डॉ. वीणा रानी की स्मृति को सम्मानित किया, बल्कि नई पीढ़ी को साहित्य और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ने का सार्थक संदेश भी दिया।
उर्वशी की प्रस्तुति में सम्मिलित कलाकार
- उर्वशी – निवेदिता महापात्र
- राजा पुरुरव – शिवम कुमार सिंह
- चित्रलेखा – अदिति झा
- अप्सराएँ – सिमरन झा, चिनापानी तम्मना रेड्डी, मानविकाः कीर्तिश्री, अनुष्का गुप्ता, परिधि पंडित, आद्या झा, परी महतो, अन्वेषा महतो
- रानी औशिनरी – अर्पिता डे
- कंचुकी (रानी की सहायिका) – श्रुति शर्मा
- सुकन्या (च्यवन ऋषि की सहधर्मिणी) – आराध्या चंद्र
- आयु (उर्वशी एवं पुरुरव का पुत्र) – समरजीत गुप्ता
पंचतत्व में सम्मिलित कालका
1.अन्वेषा महतो
2.सुमेधा दत्ता
3.तृषा सरकार
4.आकांक्षा दास
5.मौमिता चक्रवर्ती
6.सुप्रीति दास।
