
टाटा मोटर्स यूनियन की राजनीति में जातिवाद पर वीर सिंह का तीखा प्रहार,
प्रबंधन और क्षत्रिय संघ की टेल्को ईकाई से पूछे कई गंभीर सवाल
जमशेदपुर। टाटा मोटर्स वर्कर्स यूनियन की राजनीति में मजदूरों के मुद्दों से भटककर जातिवाद के प्रवेश पर भाजपा नेता एवं सनातन उत्सव समिति के संस्थापक सदस्य वीर सिंह ने आक्रामक प्रेस बयान जारी करते हुए टाटा मोटर्स प्रबंधन, यूनियन नेतृत्व और क्षत्रिय संघ की टेल्को ईकाई को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से बंटी सिंह, आर.के. सिंह और संजय सिंह (हितैषी) से जुड़े घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए कहा कि मजदूर हितों की लड़ाई को जातिगत रंग देना सोची-समझी साजिश है।
वीर सिंह ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की रश्मिरथी की पंक्तियाँ उद्धृत करते हुए कहा—
“मूल जानना बड़ा कठिन है नदियों का, वीरों का,
धनुष छोड़कर और गोत्र क्या होता है रणधीरों का?
पाते हैं सम्मान तपोबल से भूतल पर शूर,‘जाति-जाति’ का शोर मचाते केवल कायर, क्रूर।”
उन्होंने पूछा कि जब वर्ष 2019 में मजदूर नेता बंटी सिंह को कथित षड्यंत्र के तहत नौकरी से बर्खास्त किया गया, तब क्षत्रिय संघ (टेल्को ईकाई) कहाँ थी? यूनियन से जुड़े भाजपा नेता पप्पू सिंह, हर्षवर्धन सिंह और प्रकाश सिंह के निलंबन/कार्रवाई के समय भी यही संगठन मौन क्यों रहा?
नीतू सिंह के पति की मृत्यु पर न्याय की आवाज़ बनकर तब क्षत्रिय संघ आगे क्यों नहीं आया?
वीर सिंह ने आरोप लगाया कि आज यूनियन महामंत्री आर.के. सिंह के समर्थन में खड़े होकर कुछ लोगों द्वारा बंटी सिंह को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि असल मुद्दा यूनियन और प्रबंधन की नीतियों से जुड़ा है। उन्होंने सीधे सवाल दागा कि क्या टाटा मोटर्स कंपनी प्रबंधन यूनियन के सौजन्य से चल रही जातिवादी राजनीति पर मौन समर्थन दे रहा है? इसपर स्पष्ट मंतव्य कंपनी प्रबंधन को जारी करते हुए स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने दो टूक कहा कि बंटी सिंह पहले मजदूरों के भाई/बेटा/मित्र हैं, बाद में किसी समाज के। यदि एक बंटी सिंह को दबाने का प्रयास हुआ, तो मजदूर और युवा सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। यह लड़ाई किसी जाति गोत्र की नहीं, बल्कि कर्म, संघर्ष और अधिकार की है।
