
नोवामुंडी में टाटा स्टील फाउंडेशन, शंकर नेत्रालय और स्थानीय सहयोगी साहिया दीदी के संयुक्त प्रयास से आयोजित निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर का आज भव्य समापन हुआ। 17 नवंबर से प्रारंभ हुए इस स्वास्थ्य अभियान के दौरान 493 ग्रामीणों की नेत्र-जांच की गई। इनमें से 162 ग्रामीणों में मोतियाबिंद के लक्षण पाए गए, जबकि 150 ग्रामीणों का सफल ऑपरेशन कर उन्हें नई दृष्टि प्रदान की गई—जो इस शिविर की ऐतिहासिक सफलता मानी जा रही है।


ऑपरेशन उपरांत सभी मरीजों को सुरक्षित घर पहुँचाया गया और विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा देखभाल, दवाइयों और सावधानियों से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए। शिविर का फॉलो-अप कैंप 23 दिसंबर, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स नोवामुंडी में आयोजित किया जाएगा।
ग्रामीणों में इस पहल को लेकर अत्यंत उत्साह देखने को मिला। लोगों ने कहा कि इस शिविर ने न केवल उनकी आंखों की रोशनी लौटाई, बल्कि जीवन में नई उम्मीद भी जगाई। ग्रामीणों ने टाटा स्टील फाउंडेशन, शंकर नेत्रालय की चिकित्सा टीम और विशेष सहयोगी साहिया दीदी के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
लोगों ने बताया कि—
“अगले साल हम और भी बड़ी संख्या में ग्रामीणों को लेकर इस शिविर में आएंगे, ताकि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति उपचार से वंचित न रहे।”
सफल आयोजन में सभी का अद्भुत योगदान
टाटा स्टील फाउंडेशन की टीम —
तुलसीदास गनवीर (यूनिट क्लस्टर), संदीप केसरवानी (यूनिट लीड), डॉ. कुशल कुमार साहू (पब्लिक हेल्थ मैनेजर), परितोष गाग्राइ, डमरू धर महंत, प्रवीण कुमार, रजनी गोप, आशीष महतो, संजय तांती, विशेषर पात्रों, समीर, ज्योति गोप, लवली महतो, मनीषा सांडिल
— और शंकर नेत्रालय की संपूर्ण चिकित्सा टीम ने मिलकर इस अभियान को सफल बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
साथ साहिया दीदी द्वारा ग्रामीणों को जागरूक करने, प्रोत्साहित करने और शिविर तक पहुँचाने में निभाई गई भूमिका इस सफलता का प्रमुख आधार रही। उनके सहयोग से इस वर्ष बड़ी संख्या में ग्रामीण शिविर में शामिल हुए और आगामी वर्ष और भी अधिक संख्या में लाभार्थियों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है।
एक प्रेरणादायक सामाजिक पहल
यह संयुक्त प्रयास सेवा, संवेदना और मानवता का जीवंत उदाहरण है। इस शिविर ने साबित कर दिया कि जब समाज, संस्था और स्वास्थ्य विशेषज्ञ एकजुट होकर काम करते हैं, तो अंधकार भी पीछे हट जाता है और रोशनी हर घर में प्रवेश करती है।
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