
झारखण्ड स्टेट बार कौंसिल के वाईस चेयरमैन और राज्य के सुप्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश कुमार शुक्ल ने कहा है की भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू तो हुए है लेकिन इसके लिए जागरुकता और क्षमता निर्माण कार्यक्रम जरूरी है। क्योकि आज भी अधिकांश लोंग न्याय की भावना से तैयार इन नए कानूनो को पुरी तरह समझ नही पाए है।श्री शुक्ल ने कहा है बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया ने शैक्षणिक सत्र 2024-25 मे विश्वविद्यालयो और विधिक शिक्षा केन्द्रो मे पाठ्यक्रम मे तीन नए अपराधिक कानूनो को शामिल करना अनिवार्य किया है। इससे विधि के छात्रो मे पुरी तरह जागरुकता बढेंगी।श्री शुक्ल ने राज्य के सभी जिला और अनुमंडल बार एसोसिएशनो को निर्देश दिया है की वे अपने यहा इन तीनो कानूनो पर बृहद कार्यशाला आयोजित करे तथा उसमे नए अधिवक्ताओ को प्रमुखता से शामिल करे ताकी वे पुरी तरह नए अपराधिक कानूनो मे दक्ष और अनुभवी बनकर उभरे।श्री शुक्ल ने कहा है कि 21 वी सदी मे यह आजाद भारत का नया अपना कानून है जो भारत और भारतीयता के सिध्दांत से ओत प्रोत है। जिसमे न्याय, समानता और निष्पक्षता का मूल सिध्दांत है। सही मायने मे यह नए भारत की आत्मा का प्रकटीकरण है। यह न्यायिक सुगमता का नया युग है। इसलिए न्याय को प्राथमिकता का विधान को ध्यान मे रखकर जागरुकता अत्यंत आवश्यक है। इसमे विधि शिक्षा से जुड़े शैक्षणिक संस्थान अपनी महत्वपुर्ण भूमिका अदा कर सकते है। इसमे झारखण्ड स्टेट बार कौंसिल पुरा सहयोग और मार्गदर्शन करेंगा।
