
आम शिक्षा के साथ आदिवासी भाषा, संस्कृति, परंपरा और संवैधानिक अधिकारों की मिलेगी निःशुल्क शिक्षा
नोवामुंड़ी:- पश्चिमी सिंहभूम, वर्षों से देखा जा रहा सपना अब साकार होने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। आदिवासी समाज के शैक्षणिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विकास के उद्देश्य से षिरजोन टीम द्वारा कोटगढ़ स्थित पुराने पंचायत भवन में ‘षिरजोन सेंया नितिर उम्बुल स्कूल’ शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस ऐतिहासिक पहल को धरातल पर उतारने के लिए षिरजोन टीम के सदस्य रविवार सुबह से ही पंचायत भवन परिसर की साफ-सफाई और अन्य आवश्यक तैयारियों में जुटे रहे।
इस स्कूल की स्थापना का मुख्य उद्देश्य आदिवासी समाज के बच्चों, युवाओं और अन्य इच्छुक लोगों को सामान्य शिक्षा के साथ-साथ अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा, इतिहास और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। खास बात यह है कि यहां दी जाने वाली शिक्षा पूरी तरह निःशुल्क होगी, ताकि आर्थिक कठिनाइयां किसी भी व्यक्ति की सीखने और आगे बढ़ने की राह में बाधा न बनें।

षिरजोन सेंया नितिर उम्बुल स्कूल में सामान्य शिक्षा के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से संबंधित मार्गदर्शन भी दिया जाएगा। इसके अलावा आदिवासी समाज की पारंपरिक ज्ञान-परंपरा को संरक्षित करने के उद्देश्य से दामा दुमंग, रूतु-बनम, सुसुन-दुरंग जैसे पारंपरिक कला एवं सांस्कृतिक विषयों की शिक्षा भी दी जाएगी।
आदिवासी समाज के इतिहास और संवैधानिक अधिकारों पर विशेष जोर
स्कूल में पेसा कानून, विल्किन्सन रूल, पांचवीं अनुसूची तथा भारतीय संविधान में आदिवासियों के लिए किए गए विशेष प्रावधानों की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही आदिवासी महापुरुषों की जीवनी, उनके संघर्ष, योगदान और आदिवासी समाज से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं के बारे में भी विस्तार से शिक्षा प्रदान की जाएगी।
इस पहल के माध्यम से नई पीढ़ी को न केवल आधुनिक शिक्षा से जोड़ने, बल्कि अपनी सामाजिक पहचान, सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने का प्रयास किया जाएगा।
षिरजोन टीम की यह पहल आदिवासी समाज में शिक्षा, जागरूकता और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। वर्षों से संजोए गए इस सपने के साकार होने से क्षेत्र के बच्चों और युवाओं को अपनी प्रतिभा निखारने, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने तथा अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास को गहराई से समझने का अवसर मिलेगा।
मौके पर षिरजोन संस्थापक शंकर चातोम्बा, कुशनू दोरायबुरू, अमरजीत लागुरी, लक्ष्मण तिरिया, बिक्रम तिरिया, सुनिल चाम्पिया, सुमित बालमुचू, माटा बोबोंगा, कमलेश तिरिया,पुर्णो चन्र्द चातोम्बा, रोया लागुरी, जयराम इत्यादि थे।
