
प्रतिनिधि, संचार भारत नोवामुंडीसिंदूर से सजे चेहरे, उल्लास से भरे पूजा पंडाल और मां दुर्गा की विदाई के वक्त छलकती आंखें। विजयादशमी के अवसर पर नोवामुंडी में दुर्गोत्सव के समापन पर आस्था, परंपरा और भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। मां दुर्गा को विदाई देने से पहले सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सिंदूर खेला की रस्म निभाई।

एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। उत्सव के उल्लास के बीच मां से बिछड़ने की भावुकता ने माहौल को भक्तिमय बना दिया।नोवामुंडी बाजार स्थित मां दुर्गा पूजा पंडाल, मां मनसा मंदिर पूजा पंडाल, संग्राम साई पूजा पंडाल, बाली झरण पूजा पंडाल, जोजो कैंप पूजा पंडाल और महुदी पूजा पंडाल में सिंदूर खेला का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। विभिन्न पूजा पंडालों में बड़ी संख्या में सुहागिन महिलाएं पारंपरिक परिधानों में पहुंचीं और इस सांस्कृतिक अनुष्ठान में भाग लिया। चारों ओर सिंदूर की लालिमा और मां दुर्गा के जयकारों के बीच उत्सव की रौनक देखते ही बनी।मां को सिंदूर अर्पित कर सुहागिनों ने निभाई परंपरासिंदूर खेला की शुरुआत महिलाओं ने मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित कर की। इसके बाद एक-दूसरे की मांग और माथे पर सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर उत्सव की खुशियां साझा कीं और मां दुर्गा से अपने परिवार पर सदैव कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की।बंगाली संस्कृति से जुड़ी सिंदूर खेला की परंपरा शारदीय दुर्गा पूजा के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। विजयादशमी के दिन मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करने के बाद सुहागिन महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। मान्यता है कि इस रस्म के माध्यम से महिलाएं मां दुर्गा से अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद मांगती हैं। यह परंपरा महिलाओं के आपसी स्नेह, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत की भी प्रतीक है।सिंदूर की रस्म के बाद विदाई की तैयारियां, भावुक हुए श्रद्धालुपरंपरा के अनुसार, कई स्थानों पर पान के पत्तों से मां दुर्गा के गालों का स्पर्श कर उनकी मांग और माथे पर सिंदूर लगाया जाता है। इसके बाद मां को पान और मिठाई का भोग अर्पित किया जाता है। इस अनुष्ठान के माध्यम से महिलाएं मां के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करती हैं और उनके अगले वर्ष फिर आगमन की कामना करती हैं।सिंदूर खेला की रस्म पूरी होने के बाद पूजा पंडालों में मां दुर्गा की विदाई की तैयारियां शुरू हुईं। मां को विदा करते समय श्रद्धालुओं ने अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना की।

एक ओर सिंदूर खेला का उल्लास था, तो दूसरी ओर मां से बिछड़ने का गम। मां दुर्गा की विदाई के इन भावुक क्षणों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।आस्था, संस्कृति और परंपरा के रंगों के साथ संपन्न हुआ दुर्गोत्सवनोवामुंडी में सिंदूर खेला के आयोजनों ने धार्मिक आस्था, बंगाली संस्कृति और सामाजिक एकजुटता की खूबसूरत तस्वीर पेश की।

छह पूजा पंडालों में सुहागिन महिलाओं ने पारंपरिक रस्म निभाकर मां दुर्गा को भावभीनी विदाई दी। सिंदूर की लालिमा, नम आंखों और अगले वर्ष मां के फिर आगमन की उम्मीद के साथ नोवामुंडी में दुर्गोत्सव का समापन भक्तिमय और भावपूर्ण माहौल में हुआ।
