
प्रतिनिधि, नोवामुंडीनोवामुंडी वन क्षेत्र में पिछले एक महीने से अधिक समय से जंगली हाथियों का झुंड लगातार भटक रहा है। भोजन और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में जंगलों में घूम रहे हाथी अब ग्रामीण इलाकों और बस्तियों के आसपास भी पहुंचने लगे हैं। इससे ग्रामीणों में भय और चिंता का माहौल है। शनिवार देर रात करीब 16 हाथियों का झुंड कुंदरि झोर गांव पहुंच गया और खेतों में लगी धान की फसल को नुकसान पहुंचाया।


हाथियों के गांव में पहुंचने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। मशाल की रोशनी और सामूहिक प्रयास से हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर खदेड़ा गया।इधर, रविवार सुबह करीब सात बजे 16 से अधिक जंगली हाथियों का झुंड बड़ा जामदा स्थित बालाजी प्लांट के आसपास मुख्य सड़क के समीप जंगल में देखा गया। झुंड में छोटे बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। हाथियों की मौजूदगी की सूचना फैलते ही आसपास के लोगों में दहशत फैल गई। लोगों को सड़क और जंगल के आसपास जाने से सावधान रहने की सलाह दी गई।लगातार गांवों की ओर हाथियों के पहुंचने ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जंगल के इन बेजुबान जानवरों को अपना प्राकृतिक ठिकाना छोड़कर आबादी के करीब आने की नौबत क्यों आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बड़ा जामदा और नोवामुंडी के जंगलों में कथित अवैध गतिविधियों और बढ़ती मानवीय दखल से हाथियों के प्राकृतिक आवास और भोजन के स्रोत प्रभावित हो रहे हैं। जंगल में पर्याप्त भोजन और सुरक्षित स्थान नहीं मिलने पर हाथियों के गांवों की ओर आने की आशंका बढ़ जाती है।ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों के गांव में आने से जहां लोगों में दहशत फैलती है, वहीं किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचता है। इससे मानव और हाथियों के बीच टकराव की स्थिति बनती है, जो दोनों के लिए खतरे का कारण बन सकती है।ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों के झुंड की लगातार निगरानी करने, जंगलों में मानवीय दखल और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने तथा हाथियों के प्राकृतिक आवास और भोजन के स्रोत को सुरक्षित रखने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ना स्थायी समाधान नहीं है। जरूरी है कि जंगल ऐसा सुरक्षित और पर्याप्त संसाधनों वाला रहे, जहां हाथियों को भोजन, पानी और सुरक्षित ठिकाना मिल सके, ताकि उन्हें बार-बार गांवों की ओर आने के लिए मजबूर न होना पड़े।
