
जमशेदपुर के गांधी घाट के समीप स्थित छोटे बच्चों के दफनाने वाले स्थल की बदहाल स्थिति को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सौरभ विष्णु ने गहरी चिंता और नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि जिस स्थान से लोगों की भावनाएं, दर्द और अपनों की अंतिम यादें जुड़ी हों, वहां कूड़े-कचरे का अंबार लगा होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अमानवीय है। हिंदू रीति-रिवाजों में 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु के बाद उन्हें दफनाने की परंपरा है और यह स्थल कई परिवारों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है।
सौरभ विष्णु ने बताया कि वे हाल ही में कुछ पीड़ित परिवारों से मिले, जिन्होंने वहां की स्थिति को लेकर बेहद दर्दनाक बातें साझा कीं। परिवारों के अनुसार, दफन स्थल पर इतनी अधिक गंदगी और अव्यवस्था है कि जब नए शवों को दफनाने के लिए गड्ढे खोदे जाते हैं, तब कई बार पुराने अवशेष और बच्चों के कंकाल बाहर निकल आते हैं। कुछ लोगों ने यह भी बताया कि आवारा कुत्ते वहां से अवशेष उठाकर ले जाते दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि यह दृश्य किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को अंदर तक झकझोर देने वाला है। जिन माता-पिता ने अपने बच्चों को भारी पीड़ा के साथ वहां दफनाया हो, उनके लिए ऐसी घटनाएं मानसिक रूप से बेहद आघात पहुंचाने वाली हैं।
सौरभ विष्णु ने सवाल उठाया कि शहर की बड़ी औद्योगिक संस्था टाटा स्टील और प्रशासन आखिर इस गंभीर विषय पर मौन क्यों हैं, जबकि यह जमीन टाटा स्टील लीज एरिया के अंतर्गत आती है। उन्होंने कहा कि यह केवल साफ-सफाई का विषय नहीं, बल्कि मानवता, संस्कृति और सामाजिक संवेदनशीलता से जुड़ा मामला है। किसी भी सभ्य समाज में स्मृति स्थलों और कब्रगाहों का सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि गांधी घाट के पास स्थित इस पूरे क्षेत्र की तत्काल वैज्ञानिक तरीके से सफाई कराई जाए तथा उचित बाउंड्री, सुरक्षा व्यवस्था, पर्याप्त रोशनी और नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। साथ ही यहां एक सुंदर “श्रद्धांजलि गार्डन” विकसित किया जाए, जहां हरियाली, पौधारोपण और बैठने की व्यवस्था हो, ताकि अपने बच्चों को खो चुके परिवार सम्मानपूर्वक वहां आकर श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें।
सौरभ विष्णु ने कहा कि किसी भी शहर का विकास केवल बड़े प्रोजेक्ट और चमकती सड़कों से नहीं मापा जाता, बल्कि इस बात से तय होता है कि समाज अपने दुःख, स्मृतियों और संवेदनाओं का कितना सम्मान करता है। उन्होंने प्रशासन और टाटा स्टील से मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए जल्द कार्रवाई करने की मांग की, ताकि यह स्थल गंदगी और उपेक्षा की पहचान नहीं, बल्कि श्रद्धा, शांति और सम्मान का प्रतीक बन सके।
