
जनजातीय समाज की आस्था के केंद्रों को मिलेगा नया स्वरूप
जमशेदपुर। जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू नेअपने विधानसभा क्षेत्र में स्थित विभिन्न जनजातीय समुदायों के पूजा स्थलों एवं सांस्कृतिक केंद्रों के विकास को लेकर पहल की है। गुरुवार को उन्होंने झारखंड सरकार के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री चमरा लिंडा से विधानसभा स्थित उनके कक्ष में मुलाकात कर विस्तृत पत्र सौंपा तथा संबंधित मांगों पर त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया।
विधायक पूर्णिमा साहू ने मंत्री चमरा लिंडा को अवगत कराया कि उनके विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न जनजातीय समाजों द्वारा पूजा स्थलों, सरना स्थलों एवं जाहेरस्थान के संरक्षण और विकास हेतु आवेदन प्राप्त हुए हैं। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि टुइलाडूंगरी स्थित देशाउली (सरना स्थल) में कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालन के लिए एक सुसज्जित कला-सांस्कृतिक भवन का निर्माण अत्यंत आवश्यक है।
इसी प्रकार, उन्होंने बिरसानगर जोन संख्या 6 स्थित उरांव समाज के सरना स्थल के पुनर्विकास के अंतर्गत बाउंड्रीवाल निर्माण, शेड की व्यवस्था, नाली निर्माण, पेयजल सुविधा, हाईमास्ट लाइट की स्थापना तथा पेवर्स ब्लॉक अधिष्ठापन जैसे कार्य कराए जाने की आवश्यकता बताई।
विधायक पूर्णिमा साहू ने बागुनहातु, बारीडीह स्थित आदिवासी हो समाज के सरना स्थल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चहारदीवारी निर्माण की मांग की है। वहीं, उन्होंने बिरसानगर जोन संख्या 8, संत रविदास कॉलोनी स्थित जाहेरस्थान के सौंदर्यीकरण के तहत चबूतरा निर्माण, सीढ़ी निर्माण एवं स्टोर रूम की व्यवस्था किए जाने का प्रस्ताव रखा।
इसके अतिरिक्त, बिरसानगर स्थित सांताड़ (संथाल समुदाय) के जाहेरस्थान में माझी आखड़ा का समतलीकरण कर पेवर ब्लॉक बिछाने, बाउंड्रीवॉल की ऊंचाई बढ़ाने, परिसर का समतलीकरण कराने, सांस्कृतिक मंच एवं बैठक कक्ष निर्माण, सोलर लाइट स्थापना, पौधारोपण एवं माझी थान निर्माण जैसे आवश्यक संरचनात्मक कार्यों की भी अनुशंसा की है।
विधायक पूर्णिमा साहू ने मुखी समाज, बिरसानगर (जोन 5 एवं 6) के ग्राम देवता सरना स्थल की जर्जर स्थिति को देखते हुए उसके सौंदर्यीकरण एवं समुचित विकास कार्य कराने की मांग भी पत्र में की है।
इस मुलाकात में विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि ये सभी स्थल जनजातीय समाज की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान के केंद्र हैं। वर्षों से मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण समुदाय के लोगों को धार्मिक अनुष्ठान एवं सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में इन स्थलों के संरचनात्मक विकास की आवश्यकता है और सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा से भी जुड़ा विषय है। उन्होंने मंत्री से आग्रह किया कि जनजातीय समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए इन सभी प्रस्तावित कार्यों की स्वीकृति प्रदान कर शीघ्र क्रियान्वयन हेतु विभागीय स्तर पर आवश्यक निर्देश दिए जाएं।
भवदीय,
प्रेम झा
