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69 वीं राष्ट्रीय स्कूली ताइक्वांडो प्रतियोगिता में झारखंड के सुधीर कुमार ने जीता स्वर्ण पदक सत्र 2025-26 में झारखंड को मिला पहला स्वर्ण पदक

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स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड अंतर्गत झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद, रांची की अगुवाई में 69वीं राष्ट्रीय स्कूली खेल प्रतियोगिता में भाग लेने गए झारखंड के अंडर-19 बालक ताइक्वांडो खिलाड़ी सुधीर कुमार ने अपने शानदार प्रदर्शन से पूरे राज्य का मान बढ़ाया है। उन्होंने 48 से 51 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर झारखंड को सत्र 2025-26 का पहला स्वर्ण पदक दिलाया।
यह प्रतियोगिता इंदौर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, भगवती नगर, जम्मू में दिनांक 9 से 13 नवम्बर 2025 तक आयोजित की गई थी। सुधीर कुमार ने 48 से 51 किलोग्राम भारवर्ग में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने प्रतिद्वंदी जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ी को 2-0 से पराजित कर झारखंड को सत्र 2025-26 का पहला स्वर्ण पदक दिलाया। सुधीर ने टूर्नामेंट के क्वार्टर फाइनल में सीबीएसई टीम को 2-0 से, सेमीफाइनल में महाराष्ट्र को 2-0 से तथा फाइनल में जम्मू-कश्मीर को 2-0 से हराया। सुधीर ने पूरे प्रतियोगिता में एक भी राउंड गंवाए बिना यह स्वर्ण पदक हासिल किया, जो उनके शानदार खेल कौशल और दृढ़ निश्चय का प्रमाण है।
इस उपलब्धि पर राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी धीरसेन ए. सोरेंग ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि “यह पूरे राज्य की जीत है। सुधीर ने जिस जोश, संयम और आत्मविश्वास के साथ अपने प्रतिद्वंद्वियों को मात दी है, वह उनकी कड़ी मेहनत और कोच के कुशल मार्गदर्शन का परिणाम है। उनकी सफलता झारखंड के सभी नवोदित खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।”सुधीर कुमार की इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन, शिक्षा सचिव श्री उमाशंकर सिंह, परियोजना निदेशक श्री शशि रंजन, प्रशासी पदाधिकारी श्री सच्चिदानंद द्विवेदी तिग्गा, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी श्री धीरसेन ए. सोरेंग, राज्य ताइक्वांडो संघ के महासचिव श्री संजय शर्मा, उपाध्यक्ष श्री मिथलेश कुमार सिंह, कोच श्री अविनाश राम, टीम मैनेजर श्री इम्तियाज़ हुसैन एवं श्री एम. मोदस्सर, साथ ही राज्य खेल कोषांग के सभी सदस्यों ने बधाई देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएँ दी हैं। राज्य स्तर पर यह उपलब्धि झारखंड के स्कूली खेलों की निरंतर प्रगति और झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के मार्गदर्शन में विकसित हो रही खेलो झारखंड पहल की सफलता को दर्शाती है। सुधीर कुमार ने यह सिद्ध कर दिया है कि झारखंड की मिट्टी में प्रतिभा और जज़्बा दोनों मौजूद हैं, जिन्हें उचित प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर राष्ट्रीय मंच पर चमकाया जा सकता है।

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