
संवाददाता संचार भारत न्यूज़, नोवामुंडी
मां दुर्गा की आराधना, नारी शक्ति के सम्मान और भारतीय संस्कृति की मनोहारी छटा मंगलवार को टाटा डीएवी पब्लिक स्कूल, नोवामुंडी में देखने को मिली। विद्यालय में आयोजित सह-शैक्षणिक गतिविधि के अंतर्गत 94 बच्चों ने नवदुर्गा के नौ स्वरूपों को साकार कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। मां दुर्गा के विभिन्न रूपों में सजी कन्याओं ने अपनी आकर्षक प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया और सृष्टि में शक्ति, संतुलन, सृजन एवं समन्वय का संदेश दिया।

कार्यक्रम में प्राथमिक, उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की प्रस्तुति के साथ दुर्गा सप्तशती के श्लोकों का सस्वर गायन और शास्त्रीय नृत्य ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया। भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा से ओतप्रोत इस आयोजन ने विद्यार्थियों को धार्मिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सराहनीय प्रयास किया।
कन्याएं हैं शक्ति का स्वरूप : प्राचार्या
विद्यालय की प्राचार्या शशिकला ने नवदुर्गा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में सृष्टि के संचालन, परिचालन और समन्वय का गूढ़ संदेश निहित है, जिसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कन्याएं साक्षात शक्ति का स्वरूप हैं। वे जीवन में पत्नी, अर्धांगिनी और मां सहित विभिन्न भूमिकाओं में परिवार एवं समाज को संबल प्रदान करती हैं और उचित मार्गदर्शन भी करती हैं।

उन्होंने मातृत्व की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि मां ही संतान की प्रथम गुरु होती है। वह नौ महीने तक गर्भ में संतान का पालन-पोषण करती है और जन्म के बाद भी उसके जीवन को संस्कारों, स्नेह और शिक्षा से सींचती है। मां का योगदान मानव जीवन की आधारशिला है। इसलिए नारी शक्ति का सम्मान करना और कन्याओं के प्रति आदर का भाव रखना हम सभी का कर्तव्य है।
94 बच्चों ने प्रस्तुत किए मां दुर्गा के नौ स्वरूप
कार्यक्रम की संयोजिका कुसुम कुमारी ने बताया कि इस आयोजन में एलकेजी से कक्षा सातवीं तक के कुल 94 बच्चों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने नवदुर्गा के विभिन्न स्वरूपों का मनोहारी प्रदर्शन किया। इसके साथ ही दुर्गा सप्तशती के श्लोकों के गायन और शास्त्रीय नृत्य की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में भक्ति एवं सांस्कृतिक गरिमा का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के दौरान कक्षा छह की छात्रा श्रुतकृति पिंगुआ ने मातृशक्ति के नौ रूपों का विस्तृत विश्लेषण करते हुए उनके आध्यात्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया। उनकी प्रस्तुति ने नारी के विविध स्वरूपों और समाज में उसके महत्वपूर्ण योगदान को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा।
शांति पाठ और राष्ट्रगान के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम का समापन शांति पाठ एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाएं, अभिभावक और कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना की।

टाटा डीएवी पब्लिक स्कूल, नोवामुंडी का यह आयोजन न केवल मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और भक्ति की अभिव्यक्ति बना, बल्कि इसने समाज को यह संदेश भी दिया कि नारी शक्ति सृजन, संस्कार, साहस और समर्पण का प्रतीक है। कन्याओं के सम्मान और सशक्तीकरण से ही एक सशक्त, संस्कारित एवं समरस समाज का निर्माण संभव है।
