
नोवामुंडी। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर 10 अक्टूबर 2026 को नोवामुंडी कॉलेज के अंबेडकर सेमिनार हॉल में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में टाटा मेन हॉस्पिटल, नोवामुंडी की सीनियर रजिस्ट्रार एवं डॉ. इंचार्ज, ओएचएस , डॉ. अमला शंकर चटर्जी ने छात्र-छात्राओं को मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन तथा समय पर उचित परामर्श लेने के महत्व की जानकारी दी।
इस अवसर पर डॉ. अमला शंकर चटर्जी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर मौन नहीं रहना चाहिए। अपनी परेशानी माता-पिता , किसी विश्वसनीय मित्र या अपने शिक्षकों के साथ साझा करनी चाहिए। समस्याओं को मन में दबाकर रखने के बजाय उनके बारे में खुलकर बात करना और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की सलाह लेना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि लगातार तनाव और अपनी भावनाओं को व्यक्त न कर पाना कुछ लोगों में डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मनोजित विश्वास ने डॉ. चटर्जी का बुके देकर स्वागत किया। अपने स्वागत भाषण में उन्होंने कहा कि शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी आवश्यक है। विद्यार्थियों को पढ़ाई, परीक्षा और जीवन की विभिन्न चुनौतियों के दौरान तनाव का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में उन्हें अपनी समस्याओं को साझा करने में संकोच नहीं करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर वे अपने शिक्षकों से भी परामर्श ले सकते हैं।
कार्यक्रम की विषयवस्तु — अनुभवों को सुनें : वास्तविक आवाजें, वास्तविक बदलाव” पर केंद्रित रही। इसके माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े अनुभवों को सुनने और समझने तथा मानसिक समस्याओं के प्रति समाज में व्याप्त झिझक और संकोच को दूर करने का संदेश दिया गया। डॉ. चटर्जी ने तनाव को पहचानने, मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने और जरूरतमंद लोगों के प्रति संवेदनशील एवं सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा अपनी समस्याओं पर खुलकर बात करने के लिए प्रेरित किया गया। मौके पर कॉलेज के डॉ. मुकेश कुमार सिंह, साबिद हुसैन, नरेश कुमार पान, डॉ. क्रांति प्रकाश, तन्मय मंडल, श्रीमती सुमन चातोम्बा सहित काफी संख्या मे छात्र – छात्राएँ उपस्थित थे।
